भवानीमंडी | ( जगदीश पोरवाल )झालावाड़ जिले में सदियों से हाशिए पर रहे, शोषित और कानून की नजरों में ‘संदिग्ध’ माने जाने वाले कंजर समुदाय के लिए एक नई सुबह हुई है। जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया के विशेष प्रयासों से इस समुदाय का युवक मनोज कंजर अब खाकी वर्दी पहनकर कानून की रक्षा करेगा। मनोज का चयन होमगार्ड के रूप में हुआ है, जो इस समुदाय से जिले का पहला ऐसा मामला है।
उम्मीद की नई लौ: डेरों से ड्यूटी तक का सफर
राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में बसे कंजर समुदाय की पहचान लंबे समय तक अपराध और पुलिस से भागने वाले समाज के रूप में रही है। झालावाड़ जिले के चौमहला और झालरापाटन क्षेत्रों में स्थित इनके डेरों में अब बदलाव की आहट सुनाई दे रही है।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया ने बताया कि मनोज का चयन केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि उस उम्मीद की लौ है जो पूरे समुदाय को नई दिशा देगी। अब इन डेरों के बच्चे न केवल विद्यालयों का रुख कर रहे हैं, बल्कि युवा भी अपराध का रास्ता छोड़ सम्मानजनक रोजगार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
प्रशासनिक सक्रियता और रोजगार के अवसर
कंजरों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार की योजनाएं तो बीते दो दशकों से चल रही हैं, लेकिन धरातल पर इनका असर वर्तमान पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के कारण दिख रहा है।
टेक्सटाइल में रोजगार: हाल ही में भवानीमंडी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर राजस्थान टेक्सटाइल के माध्यम से समुदाय के 110 बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया।
पुलिस की भूमिका: जिला पुलिस अब केवल दमनकारी नीति के बजाय सुधारवादी दृष्टिकोण अपना रही है, जिससे समुदाय का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है।
“जब समाज का कोई वंचित व्यक्ति खाकी का हिस्सा बनता है, तो वह पूरे समुदाय के लिए मील का पत्थर साबित होता है। मनोज का चयन यह सिद्ध करता है कि अवसर मिले तो कोई भी समाज मुख्यधारा में लौट सकता है।”
— अमित कुमार बुडानिया, जिला पुलिस अधीक्षक
भविष्य की राह
झालावाड़ पुलिस द्वारा समय-समय पर चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का ही परिणाम है कि आज डेरों का माहौल बदल रहा है। मनोज का होमगार्ड बनना आने वाले समय में अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा, जिससे क्षेत्र में अपराध दर में कमी आने और सामाजिक समरसता बढ़ने की प्रबल संभावना है।

