विश्व विरासत दिवस पर झालावाड़ की विरासत को मिली नई पहचान, भव्य आयोजन संपन्न

विश्व विरासत दिवस पर झालावाड़ की विरासत को मिली नई पहचान, भव्य आयोजन संपन्न
झालावाड़, 19 अप्रैल: विश्व विरासत दिवस के अवसर पर झालावाड़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के संकल्प के साथ पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में “झालावाड़ की अतुल्य विरासत” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग एवं इंटैक झालावाड़ चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में जिले की समृद्ध विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर गहन मंथन हुआ।

जिला कलक्टर को मिला “विरासत विभूषण सम्मान”
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण वह रहा जब जिले की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ को उनके उत्कृष्ट और दूरदर्शी प्रयासों के लिए “विरासत विभूषण सम्मान” से अलंकृत किया। स्मृति चिन्ह देकर उनका अभिनंदन किया गया।

क्या बोले जिला कलक्टर

मुख्य अतिथि जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने कहा कि झालावाड़ केवल एक जिला नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति, कला और प्रकृति का अद्भुत संगम है। यहां की विरासत व धरोहरों का संरक्षण करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने बताया कि गागरोन जलदुर्ग, रामानन्द जी की छतरी और गावंड़ी तालाब स्थित रोमन एक्वाडक्ट का सौन्दर्यीकरण कराया गया है। राजकीय संग्रहालय में झालावाड़ हिस्ट्री गैलेरी और गागरोन दुर्ग गैलेरी तैयार की गई है।

आगामी योजनाएं

जिला कलक्टर ने बताया कि आने वाले समय में मनोहरथाना के जलदुर्ग को गागरोन की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। काली खाड़ व परवन नदियों के संगम पर सेल्फी पॉइंट बनाया जाएगा। इसके अलावा डग का रानी का मकबरा, गंगधार का रानी का महल और कोटडा के महल का मूल स्वरूप बनाए रखते हुए संरक्षण किया जाएगा। झालरापाटन के मदन विलास पैलेस में शिक्षा संग्रहालय का निर्माण हो रहा है। उन्होंने घोषणा की कि भवानीनाट्यशाला में 105 वर्ष बाद इसी वर्ष फिर से अभिज्ञान शकुंतलम का मंचन होगा।

मुख्य वक्ताओं के विचार

राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड की सदस्य डॉ. सज्जन पोसवाल ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी विरासत से होती है। युवाओं को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने गागरोन जलदुर्ग और संत पीपाजी की जीवनी पर भी प्रकाश डाला। इंटेक संयोजक राज्यपाल शर्मा ने झालावाड़ की छुपी विरासतों के संरक्षण में जिला कलक्टर के कार्यों को अतुलनीय बताया।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण

कार्यक्रम में जिले के ऐतिहासिक किले, प्राचीन मंदिर, स्थापत्य कला और कृषि-औद्योगिक पहचान को दर्शाती ज्ञानवर्धक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का विशेष प्रदर्शन किया गया।
विक्रम टाक ने पीपीटी के माध्यम से झालावाड़ की छुपी हुई ट्रैकिंग साइट्स की जानकारी दी।
अतुल झाला ने भविष्य में मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में दिखने वाले परिदृश्यों को पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उपखण्ड अधिकारी अभिषेक चारण ने की। अंत में उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. मधुसुदन आचार्य ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उप वन संरक्षक सागर पंवार, पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक सिराज कुरैशी समेत कई अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

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