भवानीमंडी :चापलूसों का नया फंडा : संस्था की आड में करते है पेशेवर चापलूसी



कैलाश जैन एडव्होकेट

पेशेवर चापलूसों में इन दिनों एक नई प्रवृत्ति देखने में आई है। प्रशासनिक सरकारी अधिकारियों/ पुलिस अधिकारियों आदि की चापलूसी और चाटुकारिता में पारंगत लोगों ने सरकारी अफसर से निकट संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं को माध्यम बना लिया है।

सरकारी अधिकारी या कर्मचारी मूलत: लोक सेवक

कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी मूलत: लोक सेवक होता है तथा जनता की सेवा करना और उनकी समस्याओं को हल करना प्रत्येक लोक सेवक का अनिवार्य कर्तव्य होता है। मगर चापलूस लोक सेवक के सेवक बनने में ही अपना जीवन धन्य समझते हैं।

निजी स्वार्थो के चलते प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्थाओं से जुड़कर पद हथिया लेते हैं

कुछ बेजमीर बेगैरत लोग अपने निजी स्वार्थो के चलते प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्थाओं से जुड़कर पद हथिया लेते हैं फिर संस्था के पदाधिकारी की हैसियत से सरकारी अधिकारियों (लोक सेवकों) की चापलूसी करना शुरू कर देते हैं। उन्हें संस्था के आयोजनों में मुख्य अतिथि/ अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित करते हैं और लोक सेवक महोदय की प्रशंसा में कसीदे पढ़ने शुरू कर देते हैं। अफसरों की विरुदावली गाते हैं। कुछ आदरणीय अपवादों को छोड़कर अधिकांश अधिकारी अपनी चापलूसी और प्रशंसा से प्रसन्न हो जाते हैं।

अधिकारी जी के द्वार खुल जाते हैं

बस यही से चाटुकार महोदय के लिए अधिकारी जी के द्वार खुल जाते हैं फिर चापलूस जी का अधिकारी के घर कार्यालय में आना जाना शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे चापलूस अफसर के साथ-साथ उसकी बीवी बच्चों को भी अपनी गुलामी के जरिए बस में कर लेता है।

इस प्रकार के चापलूस अधिकारी के पद स्थापना काल में भरपूर लाभ उठाते हैं। अपने प्रयासों से शहर में अपनी छवि ‘साहब के खास’ के रूप में स्थापित करते हैं।

होशियार चापलूस अधिकारी के स्थानांतरण पर भी उसका गुणगान करते हैं और निरंतर संपर्क बनाए रखते हैं। उनकी पदोन्नति पर ऐसे प्रसन्नता जाहिर करते हैं, मानो खुद का प्रमोशन हुआ हो।

संस्थाए चापलूसों की हरकतों को नजर अंदाज करती है

प्रायः सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवी संस्थाएं अपनी संस्था से जुड़े चापलूसों की हरकतों को नजर अंदाज करती है या उनसे अनभिज्ञ रहती है। ऐसे चाटुकार अपने निहित स्वार्थ के लिए संस्था का दुरुपयोग करते हैं उनकी हरकतों से संस्था की प्रतिष्ठा धूमिल होती है और संस्था के लिए आम जन में गलत संदेश जाता है।

अच्छा होगा संस्था से जुड़े संजीदा लोग इस प्रकार के चाटुकारों को अपनी संस्था से निकालत बाहर करें,इनका बहिष्कार करें, कम से कम उनकी हरकतों पर नियंत्रण रखें।

चापलूस वस्तुतः समाज कंटक हैं ?

प्रत्येक चापलूस वस्तुतः समाज कंटक हैं, जो अपनी गिरी हुई हरकतों से अवांछित लाभ उठाते हैं और एक योग्य व्यक्ति का हक मारते हैं। ऐसे समाज कंटकों को चिन्हित कर इनके घिनौने चेहरे को बेनकाब किया जाना चाहिए ।आमतौर पर एक दक्ष चापलूस इंसल्ट प्रूफ होता है । वह आसानी से हथियार नहीं डालता,उसके विरुद्ध निर्ममतापूर्वक कड़े कदम उठाए जाना जरूरी है । स्थानीय स्तर पर भी मोटी चमड़ी के चापलूस सक्रिय हैं।

नोट-चित्र एआई द्वारा निर्मित काल्पनिक है ।



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