भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )
चिलचिलाती धूप और गर्म सड़क… जहाँ लोग अक्सर अपनी मंजिलों की ओर भागते हुए आस-पास की तकलीफों से नजरें फेर लेते हैं, वहीं भवानीमंडी में मानवता की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जो यह विश्वास जगाती है कि संवेदनशीलता अभी जिंदा है।
घटना का विवरण
शनिवार को पचपहाड़ रोड पर एक हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला। पारिवारिक विवाद से आहत होकर एक बुजुर्ग माताजी ने तपती सड़क के बीचों-बीच खुद को असहाय स्थिति में छोड़ दिया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्होंने साड़ी का फंदा तक लगा रखा था।
उसी दौरान वहां से गुजर रहीं भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष रंजीता जी पाण्डे की नजर उन पर पड़ी। एक संवेदनशील नागरिक के तौर पर उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई, लेकिन इस कठिन समय में असली ‘मदद के हाथ’ उन साधारण लोगों के बढ़े जिन्हें अक्सर समाज में ‘आम आदमी’ समझ लिया जाता है।
निस्वार्थ सेवा के नायक
इस संकट की घड़ी में दो सहृदय बंधु—नवोदय कॉलोनी निवासी ऑटो चालक श्री विनोद जी और श्री दशरथ सिंह जी—बिना किसी लाभ-हानि की चिंता किए तुरंत आगे आए। उन्होंने न केवल बुजुर्ग माताजी को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया, बल्कि रंजीता जी के साथ मिलकर उनके परिवारजनों को समझाया और मामले में बीच-बचाव किया।
“अक्सर हम बड़े मंचों पर मानवता की बातें करते हैं, लेकिन असल मानवता उन लोगों के हृदय में बसती है जो आर्थिक रूप से साधारण होते हैं। ये वो लोग हैं जो सही-गलत के तर्क में उलझने के बजाय, निस्पृह भाव से मदद के लिए अपना काम छोड़ देते हैं।”
— रंजीता जी पाण्डे, पूर्व जिला अध्यक्ष (भाजपा महिला मोर्चा)
एक सीख
यह घटना हमें याद दिलाती है कि सेवा के लिए धन की नहीं, बल्कि ‘धड़कते हुए दिल’ की जरूरत होती है। विनोद जी और दशरथ सिंह जी जैसे निश्छल सेवाभावी लोग ही इस संसार को रहने लायक खूबसूरत जगह बनाते हैं। भवानीमंडी ऐसे कर्मयोगियों को नमन करता है।

