भ
भवानीमंडी। तहसील वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जाकिर मिंडा की कार्यशैली और सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान उपजे विवाद को लेकर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के युवाओं ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद से एक विशाल दोपहिया वाहन रैली निकाली गई, जो नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंची। यहाँ युवाओं ने पचपहाड़ तहसीलदार अब्दुल हफीज को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
विवाद की मुख्य जड़: सामूहिक विवाह और जमात खाना
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि हाल ही में संपन्न हुए 22 जोड़ों के सामूहिक विवाह सम्मेलन में, जो पूरी तरह जनसहयोग और लड़की पक्ष के लिए निःशुल्क था, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष जाकिर मिंडा ने बाधा उत्पन्न की।
आरोप: समाज के युवाओं का कहना है कि ईदगाह स्थित जमात खाने के उपयोग के लिए एक माह पूर्व सहमति बन गई थी, लेकिन ऐन वक्त पर अध्यक्ष ने चाबी देने से मना कर दिया और 31,000 रुपये की मांग की।
कदम: समाज ने इसे अपनी ही संपत्ति से बेदखली माना और सर्वसम्मति से ताला तोड़कर सम्मेलन संपन्न कराया। युवाओं का आरोप है कि अध्यक्ष समाज में ‘फितना-फसाद’ (विवाद) फैलाने और लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।
रैली और ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से गोलू कुरेशी, भय्यु चौधरी, नसीब पठान, रब्बानी, नईम, नियामत अली, राजिक अंसारी और सद्दाम सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के युवा शामिल थे।

अध्यक्ष का पक्ष: “नियमों का उल्लंघन और बकाया किराया”
दूसरी ओर, तहसील वक्फ बोर्ड अध्यक्ष जाकिर मिंडा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अनुशासनहीनता बताया है।
“मैंने तीन दिन के उपयोग के लिए केवल 15,000 रुपये के किराए की बात कही थी। कमेटी ने भुगतान से इनकार किया और ताला तोड़ने की धमकी दी। हमने इस संबंध में 10 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। प्रदर्शन करने वाले कुछ लोगों पर वक्फ बोर्ड का 22 से 25 लाख रुपये किराया बकाया है, जिसे छिपाने के लिए वे युवाओं को गुमराह कर रहे हैं।” – जाकिर मिंडा, अध्यक्ष तहसील वक्फ बोर्ड
थानाधिकारी का बयान: “10 अप्रैल को हुए सम्मेलन में हजारों लोगों की मौजूदगी को देखते हुए समाज ने सार्वजनिक संपत्ति (जमात खाना) का उपयोग किया। चूंकि यह किसी निजी लाभ के लिए नहीं था, इसलिए तत्काल कार्रवाई की स्थिति नहीं बनी। यदि कोई निजी संपत्ति का नुकसान करता तो कार्रवाई होती। फिलहाल दोनों पक्षों के परिवाद मिल चुके हैं और जांच जारी है।”
निष्कर्ष: भवानीमंडी का यह मामला अब आपसी संवाद से निकलकर कानूनी और प्रशासनिक दहलीज पर खड़ा है। जहाँ एक तरफ वक्फ बोर्ड नियमों और राजस्व की दुहाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ समाज इसे जनहित और अपनी मिलकियत का हक बता रहा है।

