अफवाहों पर वार, टीकाकरण स्वीकार: झालावाड़ में नुक्कड़ नाटक ने बदली सोच

भ्रांतियों का हुआ अंत, जागरूक होकर बालिकाओं ने मौके पर ही लगवाया एचपीवी का टीका

झालावाड़। ( जगदीश पोरवाल )“डर या सुरक्षा?” – इसी सवाल और नुक्कड़ नाटक के जीवंत संवादों के जरिए झालावाड़ जिले में सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ जंग तेज हो गई है। जिले में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक अनूठी पहल की है।

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. साजिद खान एवं जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार नागर के मार्गदर्शन में डॉ. शुभम गिरिराज पाटीदार द्वारा राजकीय विद्यालय झुमकी एवं तितरवासा में “एचपीवी नुक्कड़ नाटक – अफवाहों पर वार, टीकाकरण स्वीकार” का सफल मंचन किया गया।

नाटक बना बदलाव का जरिया

​लगभग 10 मिनट के इस प्रभावशाली नाटक में हास्य और भावनात्मक संवादों के माध्यम से टीके से जुड़ी अफवाहों पर चोट की गई। नाटक का संदेश “डर नहीं – सुरक्षा चुनो” इतना प्रभावी रहा कि विद्यालय की कई छात्राओं ने मंचन के तुरंत बाद ही टीकाकरण करवाने का निर्णय लिया।

​स्कूल के प्रधानाचार्य श्री नीरज सोनी ने बताया कि पूर्व में छात्राओं और अभिभावकों के मन में टीके को लेकर काफी डर था, जिसे डॉ. शुभम पाटीदार, त्रिलोक नागर, एएनएम सलोनी शर्मा, सोनम और संतोष की टीम ने कुशलतापूर्वक दूर किया।

प्रमुख भ्रांतियाँ और उनके वैज्ञानिक तथ्य

​CMHO डॉ. साजिद खान ने बताया कि समाज में प्रचलित भ्रांतियों को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ दूर किया जा रहा है:

  • भ्रांति: एचपीवी टीका नया है और सुरक्षित नहीं है। तथ्य: यह वैक्सीन वर्ष 2006 से विश्व स्तर पर उपयोग में है और इसकी सुरक्षा एवं प्रभावशीलता पूरी तरह प्रमाणित है।
  • भ्रांति: एचपीवी टीका से बांझपन होता है। तथ्य: इसका प्रजनन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, यह पूरी तरह सुरक्षित है।
  • भ्रांति: यह टीका असरदार नहीं है। तथ्य: शोध के अनुसार, यह सर्वाइकल कैंसर से बचाव में 93 से 100 प्रतिशत तक प्रभावी पाया गया है।
  • भ्रांति: यह केवल संपन्न लोगों के लिए है। तथ्य: निजी क्षेत्र में इसकी लागत ₹8,000 से ₹11,000 तक है, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध है।
  • भ्रांति: इसके दुष्प्रभाव गंभीर होते हैं। तथ्य: सामान्यतः हल्का दर्द, बुखार या थकान जैसे लक्षण होते हैं, जो 1-2 दिन में स्वतः ठीक हो जाते हैं।
  • भ्रांति: यह मासिक धर्म को प्रभावित करता है। तथ्य: इसका मासिक धर्म चक्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

टीकाकरण: कब, कहाँ और कैसे?

​जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार नागर ने बताया कि:

  • लक्षित समूह: 14 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी बालिकाएं।
  • टीकाकरण का समय: प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को।
  • स्थान: सभी पीएचसी, सीएचसी, जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज।
  • आवश्यक निर्देश: आयु प्रमाण हेतु आधार कार्ड साथ लाएं। टीकाकरण हेतु मोबाइल नंबर पर ओटीपी के माध्यम से सहमति दर्ज की जाती है। ध्यान रखें कि खाली पेट टीका न लगवाएं।

अपील: विद्यालय प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग सभी अभिभावकों से अपील करता है कि अपनी बेटियों को एचपीवी का सुरक्षा चक्र (टीका) अवश्य लगवाएं।

“एक छोटा टीका – जीवन भर की सुरक्षा”

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