खालसा सृजन दिवस एवं वैसाखी का पावन पर्व धूमधाम से मनाया गया




भवानीमंडी, 14 अप्रैल : गुरुद्वारा साहिब भवानी मंडी में खालसा सृजन दिवस तथा वैसाखी दा पावन पूरब बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह 10:30 बजे सरदार अमनदीप सिंह कुलदीप सिंह जी के परिवार की ओर से निशान साहिब के चोले की सेवा की गई।

शबद गायन प्रस्तुत किये

सप्ताह पाठ साहिब जी की समाप्ति पर विशेष कीर्तन दीवान आयोजित किया गया, जिसमें हुजूरी रागी सतनाम सिंह जी तथा तबला वादक हरकीरत सिंह जी के जत्थे ने भावपूर्ण शबद गायन प्रस्तुत किए। अंत में वैसाखी पर्व पर सरबत के भले की अरदास की गई तथा गुरु जी के अटूट लंगर जैन बोर्डिंग में छकाए गये।जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर लंगर सेवा में योगदान दिया।

सिंधी समाज ने भी मत्था टेका

इस पावन अवसर पर समस्त सिख समाज के साथ-साथ मुख्य रूप से सिंधी समाज तथा गुरु नानक नामलेवा संगत ने गुरुघर में मत्था टेका और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।



सरदार दर्शन सिंह ने इतिहास साझा किया

सरदार दर्शन सिंह जी ने खालसा सृजन दिवस का इतिहास साझा किया, उन्होंने कहा, “साल 1699 में वैसाखी के दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में हजारों सिखों के सामने तलवार निकालकर पूछा कि कौन गुरु के लिए अपना सिर देने को तैयार है? तीन बार पूछने के बाद पाँच साहसी सिख आगे आए — भाई दया सिंह, धर्म सिंह, हिम्मत सिंह, मोहकम सिंह और साहिब सिंह। इन्हें पंज प्यारे कहा गया। गुरु जी ने इन्हें अंदर ले जाकर अमृत की दीक्षा दी। जब ये पाँचों नए रूप में बाहर आए तो पूरा दरबार हैरान रह गया। फिर पंज प्यारों ने खुद गुरु जी को अमृत छकाया। उसी दिन गुरु जी ने खालसा पंथ की स्थापना की और घोषणा की कि अब खालसा मेरा रूप है, खालसा मेरी जान है। उन्होंने जात-पात का भेद मिटाकर सबको सिंह और कौर बनाया तथा पाँच ककार — केश, कंघा, कड़ा, कछहरा और किरपान धारण करने का हुक्म दिया। खालसा का मतलब था — संत-सिपाही, जो भक्ति और शक्ति दोनों को साथ लेकर अन्याय के खिलाफ खड़ा हो सके।”

अध्यक्ष का उद्बोधन

गुरुद्वारा सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार प्रीतपाल सिंह जी ने संगत को कहा कि यह पर्व हमें गुरु गोबिंद सिंह जी की उस महान विरासत की याद दिलाता है जिसका मूल था त्याग, शौर्य, सेवा, समानता और चढ़दीकला का संदेश । उन्होंने इस अवसर पर वैसाखी एवं खालसा सजना दिवस की हार्दिक बधाई दी एवं सभी की भले और सुख शांति अरदास की |

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