झालावाड़ में पुलिस बनी ‘पहली जीवन रक्षक कड़ी’, मिश्रोली थाने में हुआ लाइव प्रशिक्षण
51 हजार से अधिक लोग बन चुके हैं जीवन रक्षक कौशल में प्रशिक्षित
झालावाड़, 14 अप्रैल 2026।
“हर सेकंड कीमती है” — इसी सोच के साथ झालावाड़ जिले में आपातकालीन प्रतिक्रिया की तस्वीर बदल रही है। अब पुलिस सिर्फ कानून-व्यवस्था ही नहीं संभालेगी, बल्कि दुर्घटना या आपात स्थिति में जिंदगी बचाने वाली पहली कड़ी भी बनेगी।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त पहल ‘हार्ट सेफ झालावाड़’ अभियान के तहत मिश्रोली पुलिस थाने में सोमवार को पुलिस स्टाफ और आमजन के लिए जीवन रक्षक तकनीकों का गहन हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में सिखाई गईं ये जीवन रक्षक तकनीकें:
- CPR और BLS: हृदय गति रुकने पर त्वरित प्रतिक्रिया • हेमलिच मैन्युवर: गले में कुछ फंसने पर श्वास मार्ग खोलना • सर्पदंश प्रबंधन: प्रेशर इममोबिलाइजेशन तकनीक का सही उपयोग • AED मशीन: हृदयाघात में उपकरण का सुरक्षित संचालन • रिकवरी पोजीशन: अचेत व्यक्ति को सुरक्षित स्थिति में लाना
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया और उपाधीक्षक प्रेम कुमार चौधरी के मार्गदर्शन तथा CMHO डॉ. साजिद खान के निर्देशन में जिला नोडल अधिकारी डॉ. शुभम गिरिराज पाटीदार व टीम त्रिलोक नागर ने यह प्रशिक्षण दिया।
हीट सेफ झालावाड़ की भी शुरुआत
भीषण गर्मी को देखते हुए ‘हीट सेफ झालावाड़’ अभियान के तहत मिश्रोली थाना परिसर में ORS ATM स्थापित किया गया। पुलिसकर्मियों को हीट स्ट्रोक की पहचान, प्राथमिक उपचार और हीट रेस्क्यू स्प्रे मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही फर्स्ट एड किट भी बांटी गई, जिसमें ORS, ग्लूकोज, आइस पैक, हीट हेलमेट व जरूरी दवाइयां शामिल हैं।
थाना स्टाफ चंद्रकांत, मुकेश कुमार, मनोज कुमार, अंजू सारण, सुरेंद्र सिंह, सूरज राठौड़, शाकिर हुसैन व दुर्वा राम सामोटा ने इसे “जमीनी स्तर पर जीवन बचाने वाली क्रांतिकारी पहल” बताया। उनका कहना था कि भीड़-भाड़ या दुर्घटना स्थल पर सबसे पहले पुलिस ही पहुंचती है, ऐसे में यह प्रशिक्षण उन्हें एक प्रशिक्षित जीवन रक्षक के रूप में सशक्त करेगा।
51 हजार से ज्यादा लोग प्रशिक्षित
CMHO डॉ. साजिद खान ने बताया कि झालावाड़ अब नए जीवन रक्षक मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां हर नागरिक के जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब तक जिले में 51,000 से अधिक आमजन को जीवन रक्षक कौशल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
यह पहल सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है। एम्बुलेंस या अस्पताल पहुंचने से पहले के वे कुछ मिनट ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करते हैं। अब प्रशिक्षित पुलिस बल उन कीमती मिनटों को जिंदगी बचाने में लगाएगा।
संदेश साफ है: सही समय पर सही तकनीक से अनगिनत जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
हार्ट सेफ झालावाड़ — एक अभियान नहीं, जीवन बचाने का संकल्प।

