पचपहाड़ की बेटी का कमाल: लकवाग्रस्त मरीजों के लिए बनाया ‘यूनिवर्सल होल्डर’, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम

भवानीमंडी । (जगदीश पोरवाल )। “आवश्यकता आविष्कार की जननी है”, इस कहावत को झालावाड़ जिले के पचपहाड़ गांव की रहने वाली होनहार बेटी श्रद्धा तिलवाड़ीया ने सच कर दिखाया है। महेंद्र सिंह जी की सुपुत्री श्रद्धा ने अपनी मानवीय सोच और सीमित संसाधनों के साथ एक ऐसा ‘यूनिवर्सल होल्डर’ तैयार किया है, जो लकवाग्रस्त (Paralysis) और हाथों की उंगलियों की कार्यक्षमता खो चुके मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

​स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

​श्रद्धा का कहना है कि यह केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि किसी मरीज को उसका स्वाभिमान वापस लौटाने का एक जरिया है। अक्सर उंगलियों में मूवमेंट न होने के कारण मरीज को खाने-पीने जैसे बुनियादी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह ‘यूनिवर्सल होल्डर’ उन्हें बिना किसी मदद के चम्मच या अन्य उपकरण पकड़ने में सक्षम बनाता है।

​कैसे काम करता है यह उपकरण?

​श्रद्धा द्वारा बनाया गया यह होल्डर पूरी तरह से वैज्ञानिक सिद्धांतों (Biomechanics और Assistive Technology) पर आधारित है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • एग्रोनॉमिक सपोर्ट: यह कलाई को पूर्ण स्थिरता देता है, जिससे हाथ का संतुलन बना रहता है।
  • एंटी-स्लिप मैकेनिज्म: रबर बैंड और इलास्टिक लूप के प्रयोग से घर्षण (Friction) पैदा किया गया है, ताकि उपकरण हाथ से न फिसले।
  • कस्टमाइज्ड एंगल: चम्मच को हाथ की गति (Range of Motion) के अनुसार मोड़ा जा सकता है, जिससे भोजन करना आसान हो जाता है।
  • एंकर सिद्धांत: जब उंगलियों की मांसपेशियां काम नहीं करतीं, तब यह उपकरण कलाई और हथेली के बेस को ‘एंकर’ की तरह इस्तेमाल कर स्थिरता प्रदान करता है।

​सीमित संसाधनों में बड़ी उपलब्धि

​श्रद्धा ने इस उपकरण का निर्माण घर पर ही उपलब्ध संसाधनों से किया है। उनका मानना है कि यदि इस प्रोटोटाइप को उचित मार्गदर्शन और उन्नत सामग्री (Advanced Materials) के साथ विकसित किया जाए, तो यह चिकित्सा जगत में बड़े स्तर पर बदलाव ला सकता है।

​इन परिस्थितियों में है लाभदायक:

  1. ​दुर्घटना में उंगलियां खो चुके लोगों के लिए।
  2. ​उंगलियों में गंभीर संक्रमण या चोट के कारण मूवमेंट न होने पर।
  3. ​लकवाग्रस्त मरीजों के लिए जिनका हाथ ऊपर-नीचे तो होता है, लेकिन पकड़ कमजोर होती है।

​पचपहाड़ की इस बेटी के जज्बे और उनकी इस मानवीय पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। श्रद्धा की यह सफलता दर्शाती है कि यदि इरादे नेक हों, तो गांव की छोटी सी दहलीज से भी दुनिया बदलने वाले आविष्कार किए जा सकते हैं।

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