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झालावाड़, 10 अप्रैल।झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए एक जटिल सर्जरी के माध्यम से 61 वर्षीय बुजुर्ग मरीज की आंखों की रोशनी को सफलतापूर्वक बचाया है। इस उपलब्धि के साथ ही अब जिले में सिर, रीढ़ एवं आंखों से संबंधित जटिल कैंसर रोगों का उपचार संभव हो गया है।
मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के जमोनिया निवासी श्री हरि सिंह पिछले एक वर्ष से बाईं आंख की लगातार घटती रोशनी से परेशान थे। पिछले तीन महीनों में स्थिति गंभीर हो गई और आंख बाहर की ओर उभर आई। विभिन्न स्थानों पर उपचार के बावजूद राहत नहीं मिलने पर परिजन उन्हें झालावाड़ मेडिकल कॉलेज लेकर आए।
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी द्वारा जांच में पाया गया कि मरीज की आंख के पीछे एक बड़ी गांठ विकसित हो गई है, जो ऑप्टिक नर्व पर दबाव डाल रही थी। 30 मार्च को डॉ. योगी के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम द्वारा अत्यंत जटिल सर्जरी की गई। लगभग 6 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में 48×34×36 मिमी आकार की गांठ को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान मरीज को दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया।
डॉ. योगी ने बताया कि गांठ का स्थान अत्यंत संवेदनशील था, जिससे यह ऑपरेशन काफी जोखिमपूर्ण था। सामान्यतः इस प्रकार की सर्जरी जयपुर के एसएमएस अस्पताल या एम्स जोधपुर जैसे बड़े संस्थानों में ही संभव होती है, लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने सीमित संसाधनों में इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा कर चिकित्सा क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।
मानवता की मिसाल
विशेष उल्लेखनीय है कि अन्य राज्य के निवासी होने के बावजूद मरीज का उपचार पूरी तरह निशुल्क किया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक शर्मा एवं उप अधीक्षक डॉ. सुमित हाड़ा के विशेष सहयोग से यह संभव हो सका। वर्तमान में मरीज पूर्णतः स्वस्थ है तथा उसकी आंखों की रोशनी भी वापस आ गई है।
टीम वर्क से मिली सफलता
इस जटिल एवं ऐतिहासिक ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. रामावतार, डॉ. राजन नंदा, डॉ. अटल राज मेहता, डॉ. ज्योति काबरा, डॉ. साहिल राजा अंसारी, डॉ. अल्तमस खान, डॉ. असद सहित नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ—कीर्ति मित्तल, कन्हैया लोहार एवं मुकेश सांवरिया का सराहनीय योगदान रहा।
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