भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल ]
अगर आप प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल (विशेषकर सवाई मानसिंह अस्पताल) की ओर रुख कर रहे हैं, तो जरा संभलकर! यहाँ इलाज के साथ-साथ एक ‘विशेष पैकेज’ आपका इंतज़ार कर रहा है। प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट श्री अशोक श्रीमाल ने अपने ताजा व्यंग्य चित्र के जरिए प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की उस पोल को खोल दिया है, जिसे प्रशासन अक्सर फाइलों के नीचे दबा देता है।
क्या है यह ‘महाऑफर’?
श्रीमाल जी का कार्टून चीख-चीख कर कह रहा है कि अब आपको केवल अपनी पुरानी बीमारी के इलाज पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। अस्पताल के गेट पर कदम रखते ही ‘डंपिंग यार्ड’ की सड़ांध और ‘खुले नालों’ का स्वागत सत्कार आपको डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसे ‘फ्री गिफ्ट्स’ की गारंटी देता है।
“अस्पताल के डंपिंग यार्ड फैला रहे संक्रमण” — यह महज़ एक सुर्खी नहीं, बल्कि उन मरीजों की हकीकत है जो ठीक होने आते हैं पर एक नया संक्रमण लेकर घर लौटते हैं।
अशोक श्रीमाल के कार्टून का तीखा कटाक्ष:
कार्टून में एक बेबस मरीज को दिखाया गया है, जिसके पीछे ‘एसएमएस अस्पताल’ की इमारत है और बगल में ‘ऑफर’ का बड़ा बोर्ड लगा है— “एक बीमारी के साथ एक बीमारी फ्री”। यह चित्र उस प्रशासनिक संवेदनहीनता पर करारा तमाचा है, जहाँ गंदगी के ढेर अस्पतालों की पहचान बन गए हैं।
अस्पताल प्रशासन का ‘अनोखा’ सफाई अभियान:
अस्पताल परिसर में कूड़े के पहाड़ और मच्छरों की फौज को देखकर ऐसा लगता है जैसे प्रशासन ने ‘स्वच्छ भारत’ को ‘स्वस्थ भारत’ के खिलाफ खड़ा कर दिया है। मरीज बेचारा इस दुविधा में है कि वह अपनी पुरानी बीमारी का पर्चा दिखाए या यहाँ से मुफ्त में मिली नई बीमारी का शुक्रिया अदा करे।
मुख्य आकर्षण (जो आपको अस्पताल के बाहर ही मिल जाएंगे):
- खुले नाले: मच्छरों के लिए ‘फाइव स्टार’ ब्रीडिंग ग्राउंड।
- अस्थायी डंपिंग यार्ड: मेडिकल वेस्ट और बदबू का शानदार संगम।
- कीचड़ का कालीन: बारिश के बाद मरीजों के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था।
क्या व्यंग्य कि चुभन शासन प्रशासन की नींद उड़ेगी ?
जैसा कि श्री अशोक श्रीमाल के कार्टून से स्पष्ट है, सरकारी अस्पतालों की यह स्थिति केवल जयपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का आईना है। उम्मीद है कि इस व्यंग्य की चुभन शासन-प्रशासन की नींद उड़ाएगी और ‘फ्री बीमारी’ का यह जानलेवा ऑफर जल्द ही बंद होगा।

