3 साल बाद खुली प्रशासन की नींद! भैसाना सरपंच पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, लोकायुक्त FIR के बाद अब नोटिस जारी

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जावरा | बंशी लाल पोरवाल
कजावरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भैसाना में सरपंच पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में आखिरकार तीन साल बाद प्रशासन की नींद खुली है। वर्ष 2023 से लंबित इस शिकायत में सरपंच पूजा पासी पर शासकीय भूमि को अवैध रूप से पट्टे पर देने और इसके बदले में जनपद पंचायत जावरा के सीईओ के नाम पर पैसों की मांग करने के आरोप लगे हैं। इस मामले से जुड़ा ऑडियो-वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था।

शिकायत में आरोप है कि ग्राम पंचायत भैसाना की शासकीय भूमि पर सरपंच पूजा पासी एवं सचिव प्रकाश चावला द्वारा रुपए लेकर सीमाओं के भीतर छह लोगों से अतिक्रमण करवाया गया। इतना ही नहीं, जनपद के नाम पर भी कई लोगों से राशि वसूली की बात सामने आई है। इस पूरे मामले की शिकायत उपसरपंच एवं पंचों द्वारा की गई थी, जिसके बाद कई स्तरों पर जांच हुई और आरोप सही पाए गए।

तहसीलदार जावरा द्वारा अतिक्रमण हटाने के आदेश भी जारी किए गए और मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया गया, लेकिन इसके बावजूद पंचायत एवं जिला प्रशासन द्वारा सरपंच और सचिव पर लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत द्वारा जांच के बाद प्रकरण लोकायुक्त संगठन, उज्जैन को भेजा गया, जहां जांच उपरांत सरपंच को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई। हैरानी की बात यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी सरपंच अब तक अपने पद पर बनी हुई हैं, जिससे प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब जाकर जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन द्वारा 7 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत सरपंच पूजा पासी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समय पर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि जब शिकायत 2023 से लंबित थी, जांच में आरोप सही पाए गए और लोकायुक्त द्वारा एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई—यह बड़ा सवाल बना हुआ है। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी दबाव का परिणाम, यह जांच का विषय है।

अब निगाहें सरपंच के स्पष्टीकरण और प्रशासन द्वारा आगे उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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