भवानी मंडी | क्षेत्र के पचपहाड़ कस्बे में पेयजल किल्लत अब विकराल रूप ले चुकी है। वार्ड क्रमांक 4 और 5 के निवासी पिछले लंबे समय से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी ने अब जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। रविवार को स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब विभागीय अधिकारियों के पहुंचने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं निकल सका।
15 मिनट तक अधिकारियों को घेरा
रविवार को जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JEN) मानप्रकाश सैनी और नायब तहसीलदार मदन लाल वर्मा जब मौका मुआयना करने पहुंचे, तो उन्हें स्थानीय नागरिकों, विशेषकर महिलाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। गुस्साए वार्डवासियों ने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए करीब 15 से 20 मिनट तक तीखी बहस की। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं।
शाम को भी नहीं मिली राहत: ‘5 मिनट आया गंदा पानी’
अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत करने के लिए आश्वासन दिया था कि शाम 5:00 बजे जलापूर्ति के समय वे स्वयं उपस्थित रहकर स्थिति की समीक्षा करेंगे। हालांकि, शाम को हालात और भी बदतर नजर आए:
- समय सीमा: नल निर्धारित समय पर आए जरूर, लेकिन केवल 5 मिनट में ही सप्लाई बंद हो गई।
- पानी की गुणवत्ता: नलों से आने वाला पानी इतना गंदा और दूषित था कि वह पीने योग्य नहीं था।
- प्रभाव: वार्ड 4 और 5 के लगभग 200 से अधिक घरों के कनेक्शन इस अव्यवस्था की मार झेल रहे हैं।
जन-आक्रोश: “अब होगा उग्र आंदोलन”
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उच्च अधिकारी मौके पर मौजूद होने के बावजूद समस्या हल नहीं कर पा रहे, तो आम जनता किससे गुहार लगाए?
”अधिकारी केवल आश्वासन की राजनीति कर रहे हैं। अगर जल्द ही स्वच्छ और पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो हम सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।” — वार्ड निवासी
प्रशासनिक रुख: फिलहाल जलदाय विभाग के अधिकारियों ने तकनीकी खामियों को जल्द दूर करने की बात कही है, लेकिन धरातल पर सुधार न होने से कस्बे में भारी रोष व्याप्त है।

