भवानीमंडी व्यापार महासंघ में दरार: ‘बंद’ के आह्वान के बीच आधा बाजार खुला, संगठनों में ठनी


भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल)। एकता की दुहाई देने वाले भवानीमंडी व्यापार महासंघ की एकजुटता उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब महासंघ द्वारा महीने की अंतिम तारीख (31 मार्च) को घोषित ‘बाजार बंद’ का मिला-जुला असर देखने को मिला। नगर के करीब 40-50 प्रतिशत प्रतिष्ठान खुले रहे, जिससे महासंघ के भीतर आंतरिक कलह और बिखराव खुलकर सामने आ गया है।

घोषणा बनाम हकीकत

व्यापार महासंघ की ओर से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से बाजार पूर्ण बंद का व्यापक प्रचार किया गया था। इसके बावजूद मंगलवार को कपड़ा, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल और किराना सहित कई छोटे-बड़े शोरूम खुले नजर आए। कई दुकानदारों ने आधा शटर गिराकर व्यापार किया, तो कई पूर्ण रूप से सक्रिय रहे।

खींचतान की मुख्य वजह: ‘आखातीज’ का सीजन

महासंघ के तहत करीब 28 व्यापारिक संगठन आते हैं। इस विवाद की मुख्य जड़ वस्त्र और रेडीमेड व्यवसाय का सीजन होना बताया जा रहा है।
महासंघ का पक्ष: अध्यक्ष गिरीश सोमानी के अनुसार, 26 मार्च की बैठक में उपस्थित संगठनों ने बंद पर सहमति दी थी। 30 मार्च की आपात बैठक में भी अधिकतर संगठन बंद के पक्ष में थे, जिसके आधार पर घोषणा की गई।



रेडीमेड संघ के अध्यक्ष गगनदीप सिंह (सोनू) का कहना है कि उन्होंने सीजन के मद्देनजर 26 मार्च को ही स्पष्ट कर दिया था कि वे दुकानें बंद नहीं रखेंगे। उन्होंने महासंघ अध्यक्ष पर ‘हठधर्मिता’ का आरोप लगाते हुए कहा कि महासंघ के संरक्षक डॉ. जे.के. अरोड़ा के सुझाव (व्यापारियों की इच्छा पर बाजार खुला रखने) को भी अनसुना कर दिया गया।

वस्त्र व्यवसाय संगठन के अध्यक्ष संजय गोटा वाले का कहना है कि हमने आखातीज के सीजन को देखते हुए व्यापार महासंघ से कह दिया था कि हम माह के अंतिम दिन इस बार बाजार बंद नहीं रखेंगे 30 मार्च की बैठक में भी हमने स्पष्ट घोषणा कर दी थी वस्त्र व्यवसाय संगठन के साथ-साथ रेडीमेड जूता चप्पल ने भी कहा था कि हम भी बाजार खुला रखने का समर्थन करते हैं उसके बावजूद भी महासंघ अध्यक्ष ने अपनी हठधर्मिता के चलते बाजार बंद करने की घोषणा की गई ।

बैठक में हुई तीखी बहस
30 मार्च को हुई थी आपात बैठक

भवानीमंडी व्यापार महासंघ द्वारा 30 मार्च को बंद के विषय को लेकर बुलाई गई आपात बैठक में नगर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे उपस्थित जनों में से अधिकतर जनों ने 31 मार्च को बाजार का व्यापार खुला रखने का निवेदन भी किया था, बैठक में उपस्थित जनों में व्यापार महासंघ के संरक्षक डॉ जेके अरोड़ा ,संस्थापक अध्यक्ष राजेश नाहर, पूर्व व्यापार महासंघ अध्यक्ष नरेश माधवानी, व्यापार महासंघ सलाहकार प्रकाश गुप्ता सी ए , पूर्व महासंघ सचिव हीरालाल वीजावत और अन्य वरिष्ठ व्यापारी मौजूद थे । बावजूद इसके भी बाजर बंद के विषय को लेकर इस प्रकार की स्थिति बनना शहर के लिए एक विचारणीय विषय है ।
सूत्रों के अनुसार, 30 मार्च को अध्यक्ष गिरीश सोमानी के ट्रांसपोर्ट पर हुई बैठक में माहौल काफी गर्म रहा। वस्त्र व्यवसाय संगठन और महासंघ के पदाधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि महासंघ ने ‘बंद’ की घोषणा की, जबकि वस्त्र एवं रेडीमेड संघ ने ‘खुले’ रखने का ऐलान कर दिया।

पुराना इतिहास भी आया सामने

गौरतलब है कि व्यापार महासंघ में इस तरह की परिस्थितियां 2 वर्ष पूर्व भी बनी थीं। उस समय भी सीजन को लेकर विवाद हुआ था, लेकिन तब किराना और पुस्तक विक्रेता संघ ने महासंघ से अलग होकर बंद का समर्थन किया था।
वर्तमान घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भवानीमंडी के विभिन्न व्यापारिक संगठनों के बीच समन्वय की कमी है। सीजन के लाभ और संगठन के अनुशासन के बीच फंसे व्यापारियों के कारण महासंघ के भविष्य और इसकी साख पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

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