अंतिम सफर पर भी मानवता की मिसाल: सुशीला देवी ने जाते-जाते दो नेत्रहीनों की दुनिया रोशन की

भवानीमंड (जगदीश पोरवाल )। मृत्यु के पश्चात भी जीवन को सार्थक कैसे बनाया जा सकता है, इसका एक विलक्षण उदाहरण भवानीमंडी की सुशीला देवी शर्मा के परिजनों ने पेश किया है। मथुरा में आकस्मिक निधन के बाद, जब सुशीला देवी का पार्थिव शरीर एम्बुलेंस से भवानीमंडी लाया जा रहा था, तब परिजनों ने बीच रास्ते में ही नेत्रदान का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

प्रमुख घटनाक्रम: जब हाईवे पर रुकी एम्बुलेंस

​भारत विकास परिषद एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता ने बताया कि सुशीला देवी शर्मा (पत्नी: धनराज शर्मा, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी) का निधन मथुरा में हृदयाघात (Heart Attack) से हुआ था। परिवार जब पार्थिव शरीर लेकर कोटा के पास पहुँचा, तब सामाजिक प्रेरणा और आपसी सहमति से नेत्रदान का संकल्प लिया गया।

  • चुनौती: समय रात के 4 बजे का था और एम्बुलेंस हाईवे पर थी।
  • समाधान: शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ ने सूचना मिलते ही देर रात्रि अपने स्कूटर से 30 किलोमीटर का सफर तय किया और कोटा हाईवे (गोपालपुरा) पर एम्बुलेंस रुकवाकर नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया।
  • परिणाम: सुशीला देवी के कॉर्निया अब जयपुर आई बैंक भेजे गए हैं, जहाँ वे दो व्यक्तियों के जीवन में नया सवेरा लाएंगे।

भ्रांतियों पर भारी पड़ा संकल्प

​अक्सर परिवारों में संशय रहता है कि क्या रात के समय या चलते सफर में नेत्रदान संभव है? इस घटना ने इन सभी संशय को दूर कर दिया:

​”नेत्रदान के लिए पार्थिव शरीर को कहीं ले जाने की आवश्यकता नहीं होती। यह घर, अस्पताल या एम्बुलेंस में भी गरिमा के साथ किया जा सकता है। इसमें केवल आंखों की ऊपरी झिल्ली (कॉर्निया) ली जाती है, जिससे चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती।”

डॉ. कुलवंत गौड़, शाइन इंडिया फाउंडेशन

प्रेरणा के स्तंभ

​इस पुनीत कार्य में पार्षद राहुल बोहरा और स्वास्थ्य विभाग के जिला सलाहकार डॉ. राजकुमार शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने परिवार को इस नेक कार्य के लिए प्रेरित किया। सुशीला देवी के पुत्रों—राजू, नवीन, कमल और कुंदन शर्मा ने दुःख की इस घड़ी में भी धैर्य दिखाते हुए अपनी माँ की अंतिम विदाई को ‘परोपकार’ में बदल दिया।

एक नज़र में आँकड़े

  • भवानीमंडी का गौरव: यह नगर का 156वां नेत्रदान है।
  • सहयोग: भारत विकास परिषद एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन।
  • संदेश: मानवता की सेवा के लिए समय या स्थान बाधा नहीं बनते, केवल ‘संकल्प’ की आवश्यकता होती है।

“आपका एक निर्णय, किसी के जीवन का अंधेरा मिटा सकता है।”

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