एलपीजी संकट और प्रशासन की जलाऊ लकड़ियों पर सख्ती: दोहरी मार झेल रहे क्षेत्र के खाद्य व्यापारी


भवानीमंडी | (जगदीश पोरवाल)
वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध जैसे हालातों का असर अब स्थानीय बाजारों तक साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर कमर्शियल एलपीजी गैस की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ा है। भवानीमंडी सहित आसपास के क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट, हलवाई और अन्य खाद्य व्यवसाय पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हो चुके हैं। ऐसे में गैस की कमी और बढ़ती कीमतों ने इन व्यापारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
स्थिति यह है कि कई व्यापारियों को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, और जहां मिल भी रहे हैं, वहां उनकी कीमतें इतनी अधिक हो चुकी हैं कि छोटे व्यवसायियों के लिए लागत निकालना तक मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्च और अनिश्चित आपूर्ति के कारण उनका कारोबार घाटे में जाने लगा है।

मजबूरी में पारंपरिक ईंधन की ओर रुख

एलपीजी संकट से निपटने के लिए अब कई व्यापारियों ने वैकल्पिक ईंधनों—जैसे जलाऊ लकड़ी और कोयला—का सहारा लेना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से आगामी शादी-विवाह के सीजन को देखते हुए खान-पान का काम बढ़ने की उम्मीद रहती है, ऐसे में व्यापारी किसी भी तरह अपने व्यवसाय को जारी रखना चाहते हैं।
हालांकि, पारंपरिक ईंधनों का उपयोग भी अब आसान नहीं रह गया है। लकड़ी और कोयले की मांग अचानक बढ़ने से इनके दामों में भी इजाफा हुआ है, जिससे व्यापारियों की परेशानी और बढ़ गई है।

प्रशासन की सख्ती ने बढ़ाई परेशानी

जहां एक ओर व्यापारी संकट से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा अवैध लकड़ी कटाई, परिवहन और आरा मशीनों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

हाल ही में क्षेत्र में दो प्रमुख कार्रवाई सामने आईं—

झालावाड़ वन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित दो अवैध आरा मशीनों पर छापा मारकर भारी मात्रा में लकड़ी जब्त की और दो लोगों को गिरफ्तार किया।
शामगढ़ पुलिस ने एक पिकअप वाहन में करीब 40 क्विंटल लकड़ी का अवैध परिवहन करते हुए एक व्यक्ति को पकड़ा।
इन कार्रवाइयों से प्रशासन की सक्रियता तो स्पष्ट होती है, लेकिन इसका सीधा असर उन छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है, जो मजबूरी में लकड़ी का सहारा ले रहे हैं।

व्यापारियों में असंतोष

स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि सामान्य दिनों में प्रशासन इस तरह की गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता, लेकिन जैसे ही एलपीजी की कमी के चलते लकड़ी की मांग बढ़ी, कार्रवाई तेज कर दी गई। उनका कहना है कि वे अवैध गतिविधियों का समर्थन नहीं करते, लेकिन मौजूदा हालात में उनके पास कोई व्यवहारिक विकल्प भी नहीं है।
एक व्यापारी ने बताया, “गैस मिल नहीं रही, लकड़ी पर रोक लग रही है—ऐसे में हम काम कैसे करें? दुकान बंद करने की नौबत आ रही है।”

कानूनी दायित्व बनाम व्यावहारिक समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध लकड़ी का व्यापार पर्यावरण और कानून दोनों के लिहाज से गलत है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में छोटे व्यापारियों की मजबूरी को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

आगे क्या?

यदि जल्द ही कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति सामान्य नहीं होती और प्रशासन द्वारा लकड़ी पर इसी तरह की सख्ती जारी रहती है, तो इसका सीधा असर आने वाले वैवाहिक सीजन पर पड़ सकता है। खान-पान से जुड़े व्यवसायों में अव्यवस्था फैलने की आशंका है, जिससे आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वह इस संकट का कोई संतुलित समाधान निकाल पाता है—जैसे वैकल्पिक ईंधन की वैध व्यवस्था, एलपीजी आपूर्ति में सुधार, या व्यापारियों को अस्थायी राहत—या फिर यह संकट आने वाले दिनों में और गहराता जाएगा।

नोट- AI दोबारा बनाया गया काल्पनिक चित्र

नोट- फोटो शामगढ़ पुलिस और झालावाड़ वन विभाग की कार्रवाई ।

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