जल गंगा संवर्धन अभियान: भैसोदा में दो प्राचीन बावड़ियों का हुआ कायाकल्प

भैसोदा | ( जगदीश पोरवाल )मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार संचालित ‘जल गंगा संवर्धन एवं स्वच्छता अभियान’ के अंतर्गत रविवार को नगर परिषद भैसोदा द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में विशेष कदम उठाया गया। अभियान के तहत परिषद के अमले ने नगर की दो अति प्राचीन बावड़ियों की गहन साफ-सफाई कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया।

प्रातःकाल से शुरू हुआ श्रमदान

​नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) गिरीश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से रविवार सुबह से ही विशेष सफाई अभियान प्रारंभ किया गया था। परिषद का स्वच्छता अमला आवश्यक संसाधनों के साथ मैदान में उतरा और कड़ी मेहनत कर वर्षों पुरानी गंदगी को साफ किया।

इन स्थानों पर चला स्वच्छता अभियान

​सफाई अभियान को मुख्य रूप से दो चरणों में पूरा किया गया:

  1. अस्तर वाले बालाजी मंदिर क्षेत्र: सर्वप्रथम परिषद की टीम ने प्रसिद्ध अस्तर वाले बालाजी मंदिर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी की सफाई की। यहाँ वर्षों से जमा कचरे और झाड़ियों को हटाया गया।
  2. पटेल मोहल्ला स्थित प्राचीन बावड़ी: इसके पश्चात टीम पटेल मोहल्ला पहुंची, जहाँ रत्नावत परिवार के भेरुजी स्थान के समीप स्थित अति प्राचीन बावड़ी और उसके आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण व सफाई कार्य किया गया।

गंदगी और झाड़ियों से मिली मुक्ति

​परिषद के कर्मचारी मनोज मीणा ने बताया कि इन प्राचीन बावड़ियों में लंबे समय से कचरा जमा था और आसपास कटीली झाड़ियां उग आई थीं, जिससे जल स्रोत प्रदूषित हो रहे थे। कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत कर न केवल बाहरी झाड़ियों को काटा, बल्कि बावड़ी के भीतर उतरकर जमा गंदगी और गाद को भी बाहर निकाला।

जल संरक्षण का संदेश

​सीएमओ गिरीश शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन ऐतिहासिक जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का मुख्य लक्ष्य आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संचय करना और हमारे पारंपरिक जल स्रोतों का गौरव लौटाना है।

​नगर परिषद की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय निवासियों ने भी सराहना की है, क्योंकि ये बावड़ियां न केवल जल स्रोत हैं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं।

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