प्रदेश में दो स्थानो पर गैस सिलेंडर चोरी की घटना पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी
भवानीमंड़ी। राजस्थान में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर सिर्फ जरूरत की चीज नहीं, बल्कि ‘हाई सिक्योरिटी आइटम’ बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि जहां आम आदमी महीने भर बुकिंग और सप्लाई का इंतजार करता है, वहीं चोर गैस सिलेंडर की ‘होम डिलीवरी’ खुद ही कर रहे हैं — वो भी बिना OTP के!
जयपुर (बरकत नगर) का नज़ारा:
रविवार सुबह इलाके में ‘सिलेंडर न्याय’ की अनोखी घटना देखने को मिली। एक चोर जैसे ही सिलेंडर लेकर भागा, स्कूटी ने भी शायद महंगाई का विरोध करते हुए साथ छोड़ दिया और वह फिसल गया। फिर क्या था — जनता ने तुरंत ‘सेल्फ सर्विस पुलिसिंग’ शुरू कर दी। एक चोर पकड़ में आया, दूसरा ‘फ्री होम डिलीवरी’ की तरह गायब हो गया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक जनता अपना गुस्सा निकाल चुकी थी।
अलवर (मधुबन कॉलोनी) की कहानी:
यहां चोरों ने तो ‘टीमवर्क’ का शानदार उदाहरण पेश किया। एक बाहर बाइक पर ‘स्टार्टअप मोड’ में तैयार रहा, दूसरा घर में घुसकर सिलेंडर उठाकर बाहर आया। दिनदहाड़े ऑपरेशन सफल रहा और दोनों ‘डिलीवरी बॉय’ फरार हो गए। इलाके के लोग अभी भी सोच रहे हैं कि ये चोरी थी या कोई नई ‘सर्विस’ लॉन्च हुई है।
जनता का दर्द (और तंज):
लोगों का कहना है कि अब गैस सिलेंडर घर में रखना ऐसा है जैसे सोना रखना। फर्क बस इतना है कि सोने पर ताला लगता है और सिलेंडर पर ‘नजर’।
व्यंग्य का निष्कर्ष:
बढ़ती महंगाई और किल्लत के बीच सिलेंडर की सुरक्षा अब खुद उपभोक्ता की जिम्मेदारी बनती जा रही है। सरकार योजना बना रही है, जनता लाइन में खड़ी है, और चोर ‘एक्सप्रेस डिलीवरी’ में लगे हैं।
“रसोई में गैस कम है, लेकिन चोरी में ‘फुल प्रेशर’ चल रहा है!”

नोट- AI द्वारा बनाया गया काल्पनिक चित्र
