जाते-जाते दो जिंदगियों में रौशनी भर गए हरबंस सिंह: भवानीमंडी में बेटी-दामाद ने पेश की मानवता की मिसाल”

भवानीमंडी (राजस्थान) | कहते हैं कि इंसान दुनिया से जाने के बाद भी अमर हो सकता है, और इस बात को सच कर दिखाया है भवानीमंडी के छाबड़ा और अरोड़ा परिवार ने। हाल ही में हरबंस सिंह अरोड़ा के निधन के बाद उनके नेत्रदान से भवानीमंडी में नेत्रदान का 155वां कीर्तिमान स्थापित हुआ।

पुत्री और दामाद का प्रेरक निर्णय

​स्वर्गीय हरबंस सिंह अरोड़ा अपनी पुत्री मनमीत कौर के पास भवानीमंडी आए हुए थे, जहाँ स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण मंगलवार रात्रि उनका निधन हो गया। दुख की इस घड़ी में भी उनकी पुत्री मनमीत कौर और दामाद देवेन्द्रपाल सिंह छाबड़ा ने साहस का परिचय देते हुए पिता की आंखें दान करने का निर्णय लिया।

​”नेत्रदान केवल एक अंगदान नहीं, बल्कि किसी के अंधेरे जीवन में उजाला भरने का संकल्प है।”

प्रमुख बिंदु: सेवा का महायज्ञ

  • अमरता की ओर कदम: हरबंस सिंह अरोड़ा का कॉर्निया जयपुर आई बैंक भेजा गया है, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दुनिया देखने का अवसर मिलेगा।
  • पवित्र परंपरा: देवेन्द्रपाल सिंह छाबड़ा का परिवार कोटा संभाग का संभवतः पहला ऐसा परिवार बन गया है, जिसके 6 सदस्यों (हरबंस सिंह छाबड़ा, सुरेंद्र कौर, चरणजीत कौर, नवदीप सिंह, चचेरे भाई देवेन्द्रपाल और अब हरबंस सिंह अरोड़ा) का नेत्रदान संपन्न हुआ है।
  • त्वरित कार्यवाही: सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम 110 किमी दूर कोटा से ‘ज्योति-रथ’ लेकर रात्रि 11 बजे भवानीमंडी पहुँची।
  • आर्थिक सहयोग: परिवार ने न केवल अंगदान किया, बल्कि अभियान की निरंतरता के लिए फाउंडेशन को 11,000 रुपये की सहायता राशि भी भेंट की।

जागरूकता का बढ़ता प्रभाव

​भारत विकास परिषद के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल के अनुसार, भवानीमंडी अब नेत्रदान के क्षेत्र में एक जागरूक केंद्र बन चुका है। शोक के समय में परिवार का यह निर्णय समाज के अन्य लोगों के लिए एक मशाल का काम करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!