झालावाड़ बना “लाइफ सेविंग मॉडल”: 45 हजार से ज्यादा स्कूली बच्चे बने ‘जीवन रक्षक योद्धा’

झालावाड़/भवानीमंडी ।झालावाड़ जिले में स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर एक अनोखी क्रांति देखने को मिल रही है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे “हार्ट सेफ झालावाड़ – सीपीआर मित्र अभियान” ने अब एक जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। इस अभियान के तहत जिले में अब तक 45,000 से अधिक लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता का प्रशिक्षण देकर ‘जीवन रक्षक योद्धा’ के रूप में तैयार किया गया है।

​इसी क्रम में, ब्लॉक सुनेल के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सलोतिया में आयोजित एनएसएस (NSS) शिविर के दौरान विद्यार्थियों को जान बचाने वाली तकनीकों का गहन प्रशिक्षण दिया गया।

विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ प्रशिक्षण

​यह विशेष सत्र सीएमएचओ डॉ. साजिद खान के मार्गदर्शन और जिला सीपीआर नोडल अधिकारी डॉ. शुभम गिरिराज पाटीदार के नेतृत्व में आयोजित हुआ। टीम त्रिलोक नागर ने छात्रों को व्यावहारिक रूप से सिखाया कि संकट के समय घबराने के बजाय किस तरह धैर्य से काम लेकर किसी की जान बचाई जा सकती है।

इन तकनीकों पर रहा फोकस

​प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल डेमो के जरिए निम्नलिखित कौशल सिखाए गए:

  • CPR और BLS: दिल का दौरा पड़ने पर हृदय को पुनर्जीवित करने की तकनीक।
  • सर्पदंश प्रबंधन: सांप के काटने पर ‘प्रेशर इममोबिलाइजेशन तकनीक’ का सही उपयोग।
  • मधुमक्खी का डंक: ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली इस आम समस्या का तत्काल उपचार।
  • फर्स्ट एड किट: प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स का सही और त्वरित इस्तेमाल।
  • उपलब्धि: 45,000+ प्रशिक्षित जीवन रक्षक।
  • लक्ष्य: झालावाड़ के हर गांव को ‘हार्ट सेफ’ बनाना।
  • प्रभाव: आपातकालीन स्थितियों में मौतों के आंकड़ों में कमी लाने की कोशिश।

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