भवानीमंडी। शहर में जल अभियांत्रिकी विभाग द्वारा पेयजल की सप्लाई प्रतिदिन दो चरणों में अलग-अलग मोहल्लों में की जा रही है, लेकिन पिछले करीब एक सप्ताह से कई इलाकों में नलों से गंदा व मटमैला पानी आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थिति यह है कि कई वार्डों में तो पानी टेल तक पहुंच ही नहीं पा रहा है, जबकि उपभोक्ताओं को हर माह 30 से 40 हजार लीटर पानी की खपत दर्शाते हुए बिल थमाए जा रहे हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर जहां पानी की मात्रा कम है, वहीं दूसरी ओर उसकी गुणवत्ता भी खराब है। इससे लोगों को पीने के पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।
उपभोक्ताओं ने जताई नाराजगी
रणछोड़ गुप्ता का कहना है कि शहर में गंदा पानी आने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में बड़े शहरों जैसे हालात यहां भी बन सकते हैं। दूषित पानी से आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका है।

राजकुमार जैन ने बताया कि कई इलाकों में नलों से पीलेपन लिए हुए दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। इससे आम जनता में पेट दर्द, चर्म रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने जलदाय विभाग से पानी की गुणवत्ता की जांच कर तत्काल सुधार की मांग की।
राजकुमार पोरवाल ने कहा कि गर्मी की शुरुआत में ही विभाग पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। नलों में रोजाना मुश्किल से करीब 200-300 लीटर पानी आता है , जबकि बिल में 30 से 40 हजार लीटर पानी की खपत दर्शाई जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं के साथ अन्याय हो रहा है।
शहरवासियों ने जल अभियांत्रिकी विभाग से मांग की है कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कर सप्लाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि लोगों को साफ और पर्याप्त पानी मिल सके। साथ ही उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि यदि पानी की सप्लाई कम है तो बिलों में दिखाई जा रही खपत की भी जांच की जानी चाहिए।
जल अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी का कहना
जल अभियांत्रिकी विभाग के एईएन राजेश मुराडिया ने बताया कि गंदा व मटमैला पानी जहां-जहां भी आ रहा है वहां पर लाइन देखकर उसे दुरुस्त करवा दिया जाएगा इसके अलावा जहां-जहां भी पाइप लाइन लीकेज है उसकी भी जांच कर सोमवार को ठीक करवा दिया जाएगा ।

