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भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )
अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर जब आम आदमी की रसोई तक पहुँच जाता है तो व्यंग्यकार और कार्टूनिस्ट समाज की सच्चाई को चुटीले अंदाज में सामने लाते हैं। स्थानीय कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल द्वारा बनाया गया यह कार्टून भी मौजूदा गैस संकट और कालाबाजारी की स्थिति पर तीखा कटाक्ष करता है।
कार्टून में दो गैस सिलेंडरों को मानवीय रूप देकर संवाद के माध्यम से वर्तमान हालात को दिखाया गया है। एक तरफ घरेलू गैस सिलेंडर उदास और चिंतित दिखाई देता है, जबकि दूसरी तरफ कॉमर्शियल गैस सिलेंडर खुश और उत्साहित नजर आता है।
कार्टून का मुख्य संदेश
कार्टून का मूल संदेश यह है कि जब बाजार में किसी वस्तु की कमी होती है तो कुछ लोग उस संकट को भी मुनाफे के अवसर में बदल देते हैं।
घरेलू सिलेंडर का उदास चेहरा यह दर्शाता है कि आम उपभोक्ता गैस की कमी और बढ़ती कीमतों से परेशान है।
वहीं कॉमर्शियल सिलेंडर का मुस्कुराता चेहरा इस बात का प्रतीक है कि कुछ दलाल और मुनाफाखोर इस स्थिति का फायदा उठाकर ज्यादा पैसे कमाने में लगे हैं।
कार्टून में “होटल चलो, डबल पैसा मिलेगा” जैसी पंक्ति इस ओर संकेत करती है कि गैस की कमी के दौरान कॉमर्शियल उपयोग और ब्लैक मार्केटिंग बढ़ जाती है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा संदर्भ
कार्टून के शीर्ष भाग में अमेरिका-ईरान-इजरायल तनाव का उल्लेख है, जो यह बताता है कि वैश्विक घटनाओं का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति और आम लोगों के जीवन पर पड़ सकता है।
व्यंग्य की विशेषता
कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल ने बहुत सरल चित्र और संवाद के माध्यम से तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं—
गैस आपूर्ति में कमी
बढ़ती कालाबाजारी
संकट में भी मुनाफाखोरी
कम शब्दों और सरल चित्रों में बड़ी सामाजिक समस्या को उजागर करना ही कार्टून कला की असली ताकत है, और यह कार्टून उसी का प्रभावी उदाहरण है।
एक और अन्य कार्टून में छिपा व्यंग्य
कार्टून के संवाद में लड़के की ओर से कहा जाता है—
“आपने गलत सुना… हमारे बेटे को स्प्लेंडर नहीं, सिलेंडर चाहिए… रिसेप्शन के लिए।”
व्यंग्य का अर्थ
यह संवाद मौजूदा परिस्थितियों की विडंबना को दर्शाता है। सामान्यत: शादी-ब्याह में स्कूटर, गाड़ी या अन्य सामान की मांग की बात सुनने को मिलती है, लेकिन यहां स्थिति इतनी विचित्र हो गई है कि गैस सिलेंडर ही सबसे कीमती वस्तु बन गया है।
निष्कर्ष:
यह कार्टून सिर्फ हंसी पैदा करने के लिए नहीं है, बल्कि यह समाज और प्रशासन को यह याद दिलाता है कि संकट के समय यदि निगरानी कमजोर पड़े तो आम जनता की परेशानी बढ़ जाती है और कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हो जाते हैं।
