झालावाड़ | 10 मार्च
जिले को तंबाकू मुक्त बनाने और नई पीढ़ी को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला परिषद सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में अधिकारियों ने ग्राम स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर तंबाकू मुक्त ग्राम पंचायत बनाने का संकल्प लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश कुमार मीणा ने कहा कि चिकित्सा विभाग और जिला परिषद के संयुक्त प्रयास से युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए तंबाकू मुक्त ग्राम पंचायतें बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि जिले की प्रत्येक पंचायत समिति में चरणबद्ध तरीके से कार्य करते हुए अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों को तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यशाला में मौजूद विकास अधिकारियों ने तय किया कि 31 मई तक जिले की अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों में तंबाकू मुक्त ग्राम पंचायत की गाइडलाइन की पालना करते हुए उन्हें तंबाकू मुक्त घोषित करने का प्रयास किया जाएगा।
जिला सलाहकार तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ राजकुमार शर्मा ने बताया कि युवाओं में नशे की शुरुआत अक्सर मीठी सुपारी, पान मसाला, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों से होती है। इस पहली सीढ़ी को रोकने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तंबाकू मुक्त ग्राम पंचायत बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के इंडिकेटर्स की पालना आवश्यक है।
कार्यशाला में तंबाकू चबाने और धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि एचआईवी और टीबी से होने वाली मृत्यु की तुलना में तंबाकू उत्पादों के सेवन से होने वाली मृत्यु अधिक होती है, जबकि इन मौतों को जागरूकता और रोकथाम के माध्यम से रोका जा सकता है। साथ ही कोटपा अधिनियम 2003 की धारा 4, 5, 6 और 7 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में एक्सईएन राजेन्द्र प्रसाद निमेष, बीडीओ आदर्श कुमार मीणा, कैलाश मीणा, संजय मीणा, एईएन प्रमोद कुमार नागर, जिला परिषद स्टाफ तथा चिकित्सा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
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तंबाकू से होने वाले नुकसान-
तंबाकू चबाने व धूम्रपान से कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
एचआईवी और टीबी की तुलना में तंबाकू सेवन से होने वाली मृत्यु अधिक है।
जागरूकता और कानून की पालना से तंबाकू सेवन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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🗣 “तंबाकू मुक्त ग्राम पंचायत बनाने के लिए चिकित्सा विभाग और पंचायत स्तर पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।”
— महेश कुमार मीणा, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी
