भवानीमंडी। (जगदीश पोरवाल)
शीतला सप्तमी के अवसर पर शहर में श्रद्धा और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। राधेश्याम मंदिर की गली में स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर पर सोमवार प्रातःकाल से ही महिलाओं का पूजन के लिए पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में पूजन सामग्री के थाल लेकर नंगे पैर मंदिर पहुंचीं और माता शीतला के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि व आरोग्य की कामना की।
परंपरा के अनुसार शीतला सप्तमी से एक दिन पूर्व महिलाएं अपने घरों में ठंडा-बासी भोजन तैयार करती हैं। अगले दिन इसी भोजन का भोग लगाकर माता शीतला की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माता शीतला की आराधना से घर-परिवार को रोगों से मुक्ति मिलती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
शीतला सप्तमी मानने को लेकर असमंजस की स्थिति रही-
इस वर्ष होली और धुलेंडी की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने के कारण कई स्थानों पर धुलेंडी 3 मार्च को मनाई गई, जबकि कुछ जगहों पर 4 मार्च को। इसी कारण शीतला सप्तमी की तिथि को लेकर भी अलग-अलग समाज और परिवारों में भिन्न परंपराएं देखने को मिलीं।

इस बार तीन दिनों तक होगी शीतला सप्तमी की पूजा-
महिलाओं के अनुसार इस बार शीतला माता का पूजन सोमवार, मंगलवार और बुधवार तीनों दिन किया जा रहा है। अलग-अलग समाज और परिवार अपनी-अपनी मान्यता और परंपरा के अनुसार माताजी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
राधेश्याम मंदिर की गली में स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर पर सोमवार को भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूजा की। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही और पूरा क्षेत्र माता के जयकारों से गूंजता रहा।
परंपरा निभाने नंगे पैर पहुंचती हैं महिलाएं-
शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं हाथों में पूजन थाल लेकर नंगे पैर मंदिर पहुंचती हैं। थाल में ठंडा-बासी भोजन, हल्दी, रोली, फूल, नारियल और अन्य पूजन सामग्री रखकर माता शीतला का विधि-विधान से पूजन किया जाता है तथा परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से रक्षा की कामना की जाती है।


