भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल ) 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, वहीं 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। दोनों ही दिवस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाते हैं और समाज में अपने-अपने महत्व रखते हैं। इन्हीं दोनों दिवसों को लेकर शहर के कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल ने एक चुटीला और व्यंग्यात्मक कार्टून बनाकर सामाजिक सोच पर हल्का-फुल्का कटाक्ष किया है।
कार्टून में एक व्यक्ति महिला दिवस की चर्चा करते हुए सवाल करता है— “आज महिला दिवस है तो हम पुरुषों का दिवस कौन सा होता है?” इस पर सामने खड़ी महिला तुरंत जवाब देती है— “एक मई…”।
कार्टून के माध्यम से कलाकार ने हास्य और व्यंग्य के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की है कि समाज में महिला-पुरुष भूमिकाओं को लेकर अक्सर मजाकिया टिप्पणियां भी सुनने को मिलती हैं। एक ओर महिला दिवस महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात करता है, तो दूसरी ओर श्रमिक दिवस मेहनतकश लोगों के योगदान को याद करने का दिन है।
कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल का यह व्यंग्य लोगों को मुस्कुराने के साथ-साथ सोचने का भी मौका देता है। एक छोटे से संवाद के जरिए यह कार्टून यह बताता है कि सामाजिक रिश्तों और जिम्मेदारियों को लेकर व्यंग्य का अंदाज भी कभी-कभी सच्चाई की झलक दिखा देता है।

व्यंग्य की बात
कार्टून यह संदेश देता है कि समाज में महिला और पुरुष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन हल्के-फुल्के व्यंग्य के जरिए सामाजिक सोच को आईना दिखाने का काम कार्टून हमेशा से करते आए हैं।

