शिक्षक पढ़ाएं अपने बच्चे सरकारी स्कूल में”कार्टून में उठाया बड़ा सवाल — क्या नेता और अफसरों के बच्चे भी जाएंगे सरकारी स्कूल?

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भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )
प्रदेश के शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षकों को दी गई नसीहत इन दिनों चर्चा का विषय बन गई है। शिक्षक संगठनों के साथ संवाद के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षक अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं, ताकि सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और भरोसा बढ़ सके।

मंत्री के इस बयान के बाद शिक्षा जगत और आम लोगों के बीच बहस छिड़ गई है। कई लोगों का कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर भरोसा बढ़ाना है तो यह पहल केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

इसी मुद्दे को लेकर कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्री माल ने एक तीखा व्यंग्यात्मक कार्टून बनाया है, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्टून में तीन लोग हाथ उठाकर सवाल करते दिखाई देते हैं—

नेता और जनप्रतिनिधियों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे क्या?”

कार्टून के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि यदि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है तो सिर्फ शिक्षकों ही नहीं बल्कि अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को भी उदाहरण पेश करना होगा।

क्या कहा शिक्षा मंत्री ने-

शिक्षकों के संगठनों के साथ संवाद में दिया सुझाव
शिक्षक अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं
इससे सरकारी स्कूलों में विश्वास बढ़ेगा
शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मंशा जताई

कार्टून की बात

कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्री माल ने अपने व्यंग्य में सीधा सवाल खड़ा किया है।
कार्टून में तीन पात्र हाथ उठाकर कहते दिखते हैं—
“अगर शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं, तो क्या नेता और जनप्रतिनिधि भी ऐसा करेंगे?”
व्यंग्य का संदेश साफ है कि सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़ाने के लिए केवल सलाह नहीं, बल्कि उदाहरण भी जरूरी है।

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