भवानीमंडी | (जगदीश पोरवाल)
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर झालावाड़ जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुढ़ानिया ने एक ऐसे प्रेरक उदाहरण को सामने रखा, जो यह बताता है कि समाज में बदलाव केवल बड़े पद या शिक्षा से ही नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और जिम्मेदारी से भी संभव है।
झालावाड़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित कंजर ढेरों को अपराध से मुक्त करने के लिए पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में चन्दियाखेड़ी क्षेत्र के उमराव बाई कंजर ढेरे की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही है। यहां की उमराव बाई, जो ढेरे में “पटेल” की भूमिका निभा रही हैं, ने समाज को सही दिशा देने का उल्लेखनीय कार्य किया है।
पुलिस के अनुसार, उमराव बाई के ढेरे में पिछले पाँच वर्षों के दौरान अन्य ढेरों की तुलना में लगभग दो तिहाई तक अपराधों में कमी आई है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज के भीतर से ही नेतृत्व और जागरूकता आए तो बदलाव संभव है।
कंजरो के अन्य ढेरे भी अपराध से दूर है –
महिला दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने इसे महिला शक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि अन्य ढेरों के पटेल भी इसी तरह समाज को अपराध से दूर रखने का प्रयास करें, तो जल्द ही इन क्षेत्रों से अपराध समाप्त हो सकते हैं।
प्रेरणा का संदेश-
उम्मीदों पर ही दुनिया कायम रहती है। जब उमराव बाई जैसी साधारण और अनपढ़ महिला भी अपने समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद को जीवित रख सकती हैं, तो पूरे समाज को भी ऐसी उम्मीद बनाए रखनी चाहिए।
समाज में बदलाव की इस शांत लेकिन मजबूत पहल के लिए उमराव बाई के कार्य को सलाम।
एक नजर में पटेल उमराव बाई की उपलब्धि-
#चन्दियाखेड़ी कंजर ढेरे में निभा रही हैं “पटेल” की #जिम्मेदारीसमाज के लोगों को अपराध से दूर रहने के लिए #करती हैं प्रेरितपिछले 5 साल में ढेरे में अपराध करीब दो-#तिहाई तक कममहिला दिवस पर एसपी ने सराहा प्रयास
