भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )भवानीमंडी उपखंड की ग्राम पंचायत सूलियां में 27 फरवरी, शुक्रवार को ऐसा अद्भुत और साहसिक घटनाक्रम हुआ, जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो उठा। खेलते-खेलते 30 माह (ढाई वर्ष) का एक मासूम अचानक 60 फीट गहरे कुएं में जा गिरा। पल भर में गांव में चीख-पुकार मच गई और चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
परिजनों की सांसें थम गईं, ग्रामीणों की भीड़ कुएं के पास जमा हो गई। हर किसी के चेहरे पर डर और चिंता साफ झलक रही थी। इतने गहरे कुएं में गिरे मासूम को सुरक्षित निकाल पाना लगभग असंभव सा लग रहा था।
जब ममता बनी सच्ची “ममता”
इसी बीच वहां मौजूद 40 वर्षीय ममता बाई, जो तैराकी जानती हैं और पर्यावरण प्रेमी फूलचंद वर्मा की धर्मपत्नी हैं, ने बिना एक पल गंवाए साहसिक निर्णय लिया। उनके साथ 14 वर्षीय छात्र गोविंद मेघवाल भी आगे आया। दोनों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सीधे 60 फीट गहरे कुएं में छलांग लगा दी।
गांव वाले सांस रोककर यह दृश्य देखते रहे। नीचे पानी और अंधेरा… ऊपर उम्मीदों से भरी निगाहें। साहस, सूझबूझ और धैर्य के साथ दोनों ने मासूम तक पहुंचकर उसे संभाला और सुरक्षित ऊपर लाने का प्रयास किया। कुछ ही देर में जब मासूम को सकुशल बाहर निकाला गया तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
ईश्वर की कृपा, हिम्मत की जीत
सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि ईश्वर की कृपा से मासूम सहित ममता बाई और गोविंद मेघवाल — तीनों को कोई गंभीर चोट नहीं आई। ग्रामीणों ने दोनों साहसी जनों की जमकर सराहना की और उन्हें सच्चा नायक बताया।
इस साहसिक घटना की जानकारी पर्यावरण प्रेमी फूलचंद वर्मा द्वारा दी गई। गांव में हर जुबान पर एक ही बात थी —
“जाको राखे सैयाँ, मार सके ना कोई।”
गांव को मिला नया गर्व
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में साहस, मानवता और हिम्मत ही सबसे बड़ी ताकत होती है। ममता बाई और गोविंद मेघवाल ने न केवल एक मासूम की जान बचाई, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए साहस और प्रेरणा की मिसाल भी कायम की।
भवानीमंडी क्षेत्र आज इन दोनों वीरों पर गर्व महसूस कर रहा है।


