भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल ) अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किये गये हमले के बाद बढ़ते तनाव के बीच स्थानीय कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल ने एक मार्मिक व्यंग्य चित्र के माध्यम से विश्व राजनीति पर तीखा प्रहार किया है।
कार्टून की व्यंग्यात्मक थीम-
कार्टून में एक सफेद कबूतर पेड़ की डाल पर बैठा है और उसके मुंह से निकले संवाद बुलबुले में लिखा है— “ प्लीज! कोई तो रोको इस खून की होली को”। नीचे विश्व मानचित्र पर लाल रंग के छींटों के साथ “अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध”, “तबाही मौत”, “बमबारी जारी”, “मिसाइलों से हमला” जैसे शब्द अंकित हैं।
व्यंग्य का संदेश-
कार्टून में प्रयुक्त “होली” का प्रतीक इस बार रंगों और उल्लास का नहीं, बल्कि रक्तरंजित संघर्ष का रूप ले लेता है। कबूतर—जो शांति का प्रतीक माना जाता है—मानवता से अपील करता दिख रहा है कि युद्ध की आग को रोका जाए।
कार्टूनिस्ट ने त्योहार के प्रतीक को युद्ध की भयावहता से जोड़कर यह संदेश दिया है कि जब विश्व के शक्तिशाली देश आपसी संघर्ष में उलझते हैं, तब असली कीमत आम नागरिक चुकाते हैं। मिसाइलों और बमबारी के बीच मानव जीवन, बच्चों का भविष्य और वैश्विक शांति दांव पर लग जाती है।
कार्टून युद्ध की मानसिकता के खिलाफ बनाया गया-
अशोक श्री श्री माल का यह व्यंग्य केवल किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि युद्ध मानसिकता के खिलाफ है। उनका संकेत है कि यदि समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकाले गए तो यह “रंगों की होली” सचमुच “खून की होली” में बदल सकती है।
आज जब पूरी दुनिया शांति, सहयोग और विकास की बात करती है, ऐसे में यह कार्टून हमें याद दिलाता है कि युद्ध कभी भी स्थायी समाधान नहीं देता। शांति की पहल ही मानवता का सच्चा मार्ग है।

