भवानीमंडी में होली पर काव्य के जरिए दिया अहंकार त्याग, भक्ति और भाईचारे का संदेश
भवानीमंडी (राज.) — रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर कविता के माध्यम से समाज को अहंकार त्यागने, ईश्वर भक्ति अपनाने और आपसी प्रेम-सद्भाव को मजबूत करने का प्रेरक संदेश है ।
होली केवल रंगों और उल्लास का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के भीतर बसे अहंकार, राग-द्वेष और भेदभाव को मिटाने का अवसर भी है । कविता में भक्त प्रहलाद की अटूट श्रद्धा और होलिका दहन के प्रसंग का उल्लेख किया गया भक्ति और सत्य की शक्ति के आगे अहंकार स्वयं नष्ट हो जाता है।
कविता के माध्यम से यह भी संदेश दिया गया कि जैसे दीपावली पर अंधकार मिटाकर रोशनी फैलती है, वैसे ही होली पर रंगों के जरिए दिलों की दूरियां समाप्त होती हैं और समाज में भाईचारा मजबूत होता है।
इस अवसर पर प्रस्तुत कविता इस प्रकार है —
अहंकार मिटाने का…
जीवन को रंग-बिरंगे रंगों से भरकर
खुशियां मनाने का त्यौहार है होली…..
होली का त्यौहार बहुत कुछ सिखाता है
ईश्वर में अटूट भक्ति का परिणाम भी बताता है,
भक्त प्रहलाद को ईश्वर की भक्ति का फल मिला
अंहकारी होलिका का दहन भक्ति के आगे मिट्टी में मिला,
आदिकाल से चला रहा यह सिलसिला याद दिलाता है
देश के लोगों को हर वर्ष एक खुशियों का त्योहार मनवाता है,
अहंकार के कुचलने पर दिवाली पर रंगीन रोशनी में नहाता है
होली / धुलंडी पर रंग बिखेर कर लोगों में भेदभाव मिटाता है,
आपस में भेदभाव, राग-द्वेष दूर कर गले लगाने की
यह परंपरा त्योहार मनाने के बहाने चलती रहेगी,
लोगों के जीवन में आपसी मेल-मिलाप से रहने का
संदेश देकर खुशियों के रंग बिखरते रहेगी।
रंग बिरंगी खुशियों का त्योहार होली आपके जीवन के रंगीन सपनों को साकार करें।
जगदीश पोरवाल,
संदेश पोरवाल एवं परिवार, भवानीमंडी (राज.)
होली एवं धुलंडी की हार्दिक शुभकामनाएँ आपसी प्रेम, सद्भाव और मेल-मिलाप की परंपरा सदैव बनी रहे।



