भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )शहर के सामाजिक कार्यकर्ता गणेश सालेचा ने बैंकिंग व्यवस्था में आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर को पत्र लिखकर लोन एग्रीमेंट एवं अन्य बैंकिंग दस्तावेज क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की मांग की है।
अपने पत्र में सालेचा ने उल्लेख किया कि वर्तमान में अधिकांश बैंक ग्राहकों को जो लोन एग्रीमेंट, शर्तें एवं अन्य आवश्यक फॉर्म उपलब्ध कराते हैं, वे मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा में होते हैं। देश के ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे ग्राहक हैं, जो अंग्रेजी भाषा को न तो पढ़ पाते हैं और न ही उसकी कानूनी शब्दावली को समझ पाते हैं। ऐसी स्थिति में वे बिना पूरी जानकारी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार ग्राहक को बाद में लोन की शर्तों, ब्याज दर, दंडात्मक प्रावधानों या अन्य नियमों की जानकारी न होने के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। गंभीर परिस्थितियों में ग्राहक बैंकिंग नियमों के जाल में उलझ जाता है, जिससे निकलना कठिन हो जाता है।
सालेचा ने यह भी उल्लेख किया कि ग्राहक की मृत्यु होने की स्थिति में नामित व्यक्ति (नोमिनी) को दिए जाने वाले दावे के फॉर्म भी पूर्णतः अंग्रेजी में होते हैं। भाषा की बाधा के कारण परिजनों को फॉर्म भरने और प्रक्रिया पूरी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
पत्र में उन्होंने मांग की है कि रिजर्व बैंक सभी बैंकों को स्पष्ट निर्देश जारी करे कि लोन एग्रीमेंट, नियम व शर्तें तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी या संबंधित राज्य की क्षेत्रीय भाषा में भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं। इससे ग्राहक पारदर्शी ढंग से शर्तों को समझकर निर्णय ले सकेगा और बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास भी मजबूत होगा।
सालेचा का मानना है कि यह व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण व सामान्य वर्ग के ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी तथा बैंकिंग प्रणाली अधिक जनहितैषी और जवाबदेह बनेगी।
