मिश्रौली (अमज़द अली)। क्षेत्र के संतरा उत्पादक किसानों के लिए इस बार सीजन नई उम्मीदों और संभावनाओं से भरा नजर आ रहा है। गर्मी में तैयार किए गए पौधों पर एक साथ आई भरपूर फूलों की बहार ने किसानों के चेहरे खिला दिए हैं। दिसंबर में संभावित उत्पादन को देखते हुए किसान अभी से वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन में जुट गए हैं।
बागानों में इन दिनों बड़े पैमाने पर विशेष पोषक तत्वों और कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि फूलों की मजबूत सेटिंग हो और बेहतर गुणवत्ता का फल मिल सके। खेतों में सुबह-शाम किसानों की सक्रियता और निगरानी से बागानों में रौनक देखने लायक है।

फूल और नई फूटान के लिए खास प्रबंधन
किसानों का कहना है कि फूल आने का समय संतरे की फसल का सबसे संवेदनशील चरण होता है। इसी दौरान फूल झड़ने, कीट प्रकोप और पोषण की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष घोल का स्प्रे किया जा रहा है, जिससे फूलों की पकड़ मजबूत हो, नई फूटान सक्रिय हो तथा कोमल पत्तियां और कलियां कीटों से सुरक्षित रहें।
एक बीघा क्षेत्र के लिए किसान 1 लीटर अमीनो एसिड बेस टॉनिक, 250 ग्राम बोरॉन, 300 ग्राम थायोमेथाग्राम (कीटनाशी) और 1 किलो घुलनशील खाद मिलाकर छिड़काव कर रहे हैं। यह मिश्रण पौधों को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराता है और शुरुआती अवस्था में रोग व कीटों से सुरक्षा देता है।
मौसम अनुकूल रहा तो रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना
कृषि जानकारों के अनुसार यह स्प्रे लगभग एक माह तक प्रभावी रहता है। इससे फूलों के झड़ने की समस्या कम होती है तथा फल का आकार, रंग और गुणवत्ता बेहतर बनने की संभावना रहती है। फिलहाल मौसम अनुकूल बना हुआ है। यदि तापमान संतुलित रहा और पाला या तेज आंधी जैसी स्थिति नहीं बनी, तो इस बार उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
संतरे के पौधों में फूल आना अच्छी पैदावार का संकेत है। इस समय संतुलित पोषण और अनुशंसित दवाओं का ही छिड़काव करें। मौसम अनुकूल रहा तो इस बार उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है।”
ओमप्रकाश गोचर, वरिष्ठ पर्यवेक्षक, उद्यान विभाग


