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जनसंदेश
कोटा। ( जगदीश पोरवाल ) रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), कोटा मंडल ने अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान यात्री सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल पेश की है। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त पवन कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में चलाए गए अभियानों के तहत आरपीएफ ने अपराधियों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ यात्रियों के खोए हुए सामान को लौटाकर ‘जनविश्वास’ को और मजबूत किया है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने इस अवधि की उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी साझा की।
प्रमुख उपलब्धियां एक नज़र में:
- चोरी के मामलों का खुलासा: यात्रियों के सामान की चोरी से संबंधित 5 प्रकरणों को सुलझाते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनसे लगभग ₹8 लाख मूल्य की चोरी की संपत्ति बरामद की गई।
- जनविश्वास अधिनियम के तहत कार्रवाई: अधिनियम लागू होने से 27 जुलाई 2026 तक नियम तोड़ने वाले 3,932 व्यक्तियों का चालान कर ₹22.44 लाख की पेनल्टी वसूल की गई।
- रेलवे अधिनियम के तहत मामले: रेलवे कानून की विभिन्न धाराओं में कुल 3,969 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें अदालतों द्वारा आरोपियों पर ₹11.17 लाख से अधिक का अर्थदंड (फाइन) लगाया गया।
34 बच्चों का हुआ सुरक्षित रेस्क्यू
मानवीय संवेदनाओं और मुस्तैदी का परिचय देते हुए आरपीएफ कोटा मंडल ने ट्रेनों व स्टेशनों से कुल 34 बच्चों (24 बालक एवं 10 बालिकाएं) को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इन सभी बच्चों को आवश्यक देखरेख और कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया गया है।
63 यात्रियों को लौटाया ₹44 लाख का छूटा हुआ सामान
यात्रा के दौरान जल्दबाजी या भूलवश छूटे सामान को सही सलामत उसके असली मालिकों तक पहुंचाने के लिए ‘ऑपरेशन अमानत’ के तहत बेहतरीन कार्य किया गया। आरपीएफ ने 63 यात्रियों को उनका खोया या छूटा हुआ ₹43.96 लाख (लगभग ₹44 लाख) का सामान सकुशल वापस लौटाया।
मंडल प्रशासन का संदेश:
“रेलवे सुरक्षा बल, कोटा मंडल यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा और उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए निरंतर तत्पर है। सुरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करने के लिए अपराध नियंत्रण और जनहितकारी कदम आगे भी इसी तरह जारी रहेंगे।”
— सौरभ जैन, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक

