गुटखा-शराब की लिस्ट तैयार, लेकिन जर्जर स्कूल और खाली पदों का क्या हुआ ?”

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जगदीश पोरवाल

राजस्थान की शिक्षा मंत्री मदन दिलावर हमेशा अपने बयानो को लेकर सुर्खियों में रहे हैं ।उनके बयानों को लेकर विपक्ष ने भी कई बार सरकार को कटघरे में भी खड़ा किया है ।कार्टूनिस्ट अशोक ने अपने कार्टून में प्रदेश के शिक्षा विभाग पर व्यंग भरे लहजे में बताया कि राज्य में इन दिनों पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा ‘सूचियों’ पर शोध चल रहा है। शिक्षा मंत्री दिलावर जी के एक ताजा बयान ने राज्य के गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने फरमाया है कि वे गुटखा खाने और शराब पीने वाले शिक्षकों की एक विस्तृत लिस्ट तैयार कर रहे हैं।

​इस ऐतिहासिक फैसले के बाद शिक्षा विभाग के दफ्तरों में अब कॉपियां जांचने के बजाय यह सूंघने की ट्रेनिंग दी जा रही है कि किस गुरुजी के मुंह से इलायची की खुशबू आ रही है और किसके से ‘राजश्री’ या ‘विमल’ की।

​”पूछता है राजस्थान” – पुरानी लिस्टें गायब, नई की तैयारी!

​मंत्री जी के इस ‘अनोखे’ अभियान पर आम जनता और कार्टून के मुख्य पात्र ने हाथ में अखबार थामकर कुछ तीखे और कड़वे सवाल दागे हैं:

​खाली पदों की लिस्ट का क्या हुआ?:

प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए मास्टर साहब नहीं हैं, लेकिन जनता पूछ रही है कि रिक्त पदों को भरने वाली लिस्ट आखिर किस अलमारी में धूल खा रही है?

​खस्ताहाल स्कूल भवनों की फाइल कहां है?: अखबारों की सुर्खियां चिल्ला-चिल्ला कर कह रही हैं कि प्रदेश के स्कूलों में कक्षाएं जर्जर हो चुकी हैं, छतें टपक रही हैं और भवन खस्ताहाल हैं। पर लगता है, विभाग को दीवारों की दरारों से ज्यादा शिक्षकों की ‘व्यसन सूची’ में दिलचस्पी है।

शिक्षकों के दांत एकदम मोतियों जैसे चमकने चाहिए!

​”लगता है सरकार का मानना है कि भले ही स्कूल की छत गिर जाए, या स्कूल में एक भी शिक्षक न हो, लेकिन जो एकाध शिक्षक बचे हैं, उनके दांत एकदम मोतियों जैसे चमकने चाहिए और उनके फेफड़े एकदम साफ होने चाहिए! पढ़ाई हो न हो, अनुशासन कागजों पर नंबर वन रहना चाहिए।”

पुरानी लिस्टो से ध्यान हटाना मकसद है?

​शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का मानना है कि शिक्षा में सुधार के बुनियादी मुद्दों (जैसे अच्छी बिल्डिंग और पर्याप्त शिक्षक) को किनारे रखकर इस तरह की ‘जासूसी लिस्टें’ बनाना असली समस्याओं से ध्यान भटकाने का एक बेहतरीन राजनीतिक नुस्खा है। अब देखना यह है कि जर्जर स्कूलों की मरम्मत पहले होती है या गुटखेबाजों की लिस्ट पहले वायरल होती है!

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