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भवानीमंडी/भैसोदामंडी। ( जगदीश पोरवाल )
प्राकृतिक आपदा या मौसम का मिजाज किसी के नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन संकट के समय जनता से संवाद और समस्या का समाधान पूरी तरह प्रशासनिक सिस्टम के हाथ में होता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर सटे दो जुड़वां कस्बों—भैसोदामंडी (म.प्र.) और भवानीमंडी (राज.)—में दो दिन पूर्व आई तेज आंधी-तूफान के दौरान बिजली विभागों की कार्यप्रणाली में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला। जहां एक ओर संसाधनों की कमी के बावजूद एमपी का सिस्टम ‘स्मार्ट’ नजर आया, वहीं दूसरी ओर भारी-भरकम स्टाफ होने के बाद भी राजस्थान का विभाग उपभोक्ताओं से संवाद के मामले में पूरी तरह ‘लाचार’ दिखा।
भैसोदामंडी (MP): छोटा दफ्तर, बड़ा कमिटमेंट; पल-पल का अपडेट और पेपरलेस व्यवस्था
मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत आने वाले भैसोदामंडी में महज एक सहायक अभियंता (एई) बैठते हैं और विभाग का दफ्तर भी काफी छोटा है। लेकिन इनकी कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और उपभोक्ता-हितैषी है।
- व्हाट्सएप से सीधा संवाद: विभाग ने ग्रामीण व कस्बाई उपभोक्ताओं के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे हैं। इसमें न सिर्फ बिजली कटौती की जानकारी दी जाती है, बल्कि संबंधित इलाके के लाइनमैन का नाम और नंबर भी उपलब्ध रहता है।
- सहानुभूति और खेद प्रकट: दो दिन पहले आए तूफान के कारण जब ७-८ घंटे बिजली ठप रही, तो विभाग ग्रुप पर पल-पल की मॉनिटरिंग और सुधार कार्य का अपडेट देता रहा। बिजली बहाल होने के बाद बुधवार को विभाग ने उपभोक्ताओं के निजी नंबरों पर मैसेज भेजकर प्राकृतिक आपदा से हुए व्यवधान के लिए बाकायदा खेद (माफी) प्रकट किया।
- एक साल से पूरी तरह पेपरलेस: भैसोदामंडी में पिछले एक साल से अधिक समय से कागजी बिलों का झंझट खत्म कर दिया गया है। उपभोक्ताओं को सीधे व्हाट्सएप पर बिल का विवरण मिल जाता है।
भवानीमंडी (Raj): बड़ा अमला, बड़ी उम्मीदें, लेकिन संवाद के नाम पर ‘सन्नाटा’
इसके ठीक विपरीत, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) के तहत आने वाले भवानीमंडी कस्बे में उप-जिला स्तर का भारी-भरकम प्रशासनिक अमला मौजूद है। यहां अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों और दफ्तरी स्टाफ की कोई कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक दौर की संवाद व्यवस्था के नाम पर यहां ढाक के तीन पात हैं।
- उपभोक्ता परेशान, फोन घनघनाते रहे: आंधी-तूफान के दौरान भवानीमंडी क्षेत्र में भी घंटों लाइट बंद रही। उपभोक्ताओं को यह जानने का कोई जरिया नहीं था कि बिजली कब तक आएगी। परेशान लोग अधिकारियों को फोन लगाते रहे, लेकिन कहीं से भी संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं मिला।
- तकनीक से दूरी: भवानीमंडी के उपभोक्ताओं के पास ऐसा कोई प्लेटफॉर्म नहीं है जहां उन्हें लोकल फॉल्ट या मेंटेनेंस की अग्रिम जानकारी मिल सके।
वार्ड वाइज व्हाट्सएप ग्रुप से सुधर सकते हैं हालात
भवानीमंडी के जागरूक उपभोक्ताओं का मानना है कि भले ही सभी उपभोक्ताओं को एक साथ जोड़ना तकनीकी रूप से कठिन हो, लेकिन विभाग चाहे तो वार्ड वाइज चुनिंदा गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को जोड़कर व्हाट्सएप ग्रुप बना सकता है। इससे कोई भी व्यवधान होने पर सही जानकारी तुरंत पूरे वार्ड में फैल जाएगी और लोग बेवजह परेशान होने और अफवाहों से बच सकेंगे।
बड़ा सवाल:
प्राकृतिक आपदा पर किसी का जोर नहीं है, लेकिन आपदा के समय जनता को मानसिक राहत देना और उनसे सीधा संवाद बनाए रखना पूरी तरह विभाग के हाथ में है। भवानीमंडी का भारी-भरकम स्टाफ भैसोदामंडी के इस ‘लो-बजट, हाई-टेक’ और संवेदनशील मॉडल से सीख कब लेगा?

