जगदीश पोरवाल
बॉलीवुड का वो मशहूर गाना तो आपने सुना ही होगा— “धीरे-धीरे प्यार को बढ़ाना है, हद से गुजर जाना है…”। तेल कंपनियों ने इस रोमांटिक गाने को इतनी गंभीरता से लिया कि पिछले महज 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों को ‘हद से पार’ पहुंचा दिया है। कार्टूनिस्ट ‘अशोक’ के इस स्केच में आम आदमी की स्कूटी भले ही स्टार्ट न हो, लेकिन दामों को देखकर उसका दिमाग जरूर 180°C पर उबल रहा है।
विदेशी तड़का: खाड़ी का तनाव और ‘होर्मुज’ का फाटक
अब आप सोचेंगे कि तेल कंपनियों को अचानक जनता से इतना ‘अगाध प्रेम’ क्यों हो गया? तो जनाब, इसके पीछे पूरा इंटरनेशनल सस्पेंस थ्रिलर है। खाड़ी देशों में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और ‘होर्मुज’ का समुद्री रास्ता इन दिनों आँख-मिचौली खेल रहा है— कभी बंद, कभी चालू! जब पूरी दुनिया इस ग्लोबल संकट में पेट्रोल के आंसू रो रही है, तो भला भारतीय तेल कंपनियां बहती गंगा में हाथ धोने से कैसे पीछे रहतीं? खाड़ी देशों में तनाव होता है और सीधा धुआं भारतीय मिडिल क्लास की जेब से निकलता है।
10 दिन का धमाकेदार स्कोरकार्ड
क्रिकेटर भले ही फ्लॉप हो जाएं, लेकिन तेल कंपनियों का ‘रन-रेट’ एकदम टॉप पर है। पिछले 10 दिनों में 4 बार दाम बढ़ाकर जनता पर जो सर्जिकल स्ट्राइक हुई है, उसका गणित यह है:
- 15 मई: पेट्रोल ₹3.14 और डीजल ₹3.11 की भारी ओपनिंग।
- 19 और 23 मई: करीब 90-90 पैसे की दो छोटी किश्तों में ‘सॉफ्ट अटैक’।
- 25 मई (ताजा हमला): पेट्रोल पर ₹2.61 और डीजल पर ₹2.71 का तगड़ा ‘हेलीकॉप्टर शॉट’।
सूरज भी हैरान, जनता परेशान!
कार्टून में आसमान से देख रहा सूरज भी हैरान है कि “भैया, जितनी गर्मी मैं नहीं दे पा रहा, उतनी आग तो पेट्रोल पंपों पर लगी है!” अब वो दिन दूर नहीं जब लोग अपनी गाड़ियों में पेट्रोल भरवाने नहीं, बल्कि सिर्फ ₹10 का ‘पेट्रोल स्प्रे’ करवाने जाएंगे ताकि गाड़ी से रईसी की खुशबू आती रहे।
तेल कंपनियों का संदेश साफ है— युद्ध दुनिया के किसी भी कोने में हो, दाम तो हम यहीं बढ़ाएंगे। अब आम जनता के पास दो ही विकल्प हैं: या तो खाड़ी देशों में शांति के लिए हवन करवाएं, या फिर अपनी स्कूटी में तुरंत पैडल लगवा लें!
(साभार-कार्टून अशोक श्री श्रीमाल )

