जगदीश पोरवाल
राजस्थान में लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी बीच भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल राठौड़ द्वारा एक माह में राजनीतिक नियुक्तियां किए जाने के बयान ने सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है।
इधर, चर्चित कार्टूनिस्ट अशोक ने अपने ताजा कार्टून में इस मुद्दे को प्रदेश में लगातार सुर्खियों में रहे पेपर लीक प्रकरण से जोड़ते हुए तीखा व्यंग्य किया है। कार्टून में एक पात्र दूसरे से कहता नजर आता है— “पता लगाओ ना कि किस-किस के नाम हैं!” जिस पर जवाब आता है— “पेपर लीक वालों को काम दे दिया है… हो जाएगी पर्ची लीक…”।
कार्टून का व्यंग्य साफ तौर पर यह संकेत देता है कि जिस तरह प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने युवाओं के भरोसे को झकझोर दिया, उसी तरह राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। कार्टूनिस्ट ने हास्य के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब लोगों को नियुक्तियों की सूची भी “लीक” होने का इंतजार रहने लगा है।
प्रदेश में नीट सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों की चर्चाएं अभी थमी भी नहीं हैं कि इस कार्टून ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी यह व्यंग्य खूब चर्चा में है।
कार्टूनिस्ट अशोक का यह कार्टून केवल हास्य नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल पर एक तीखी टिप्पणी माना जा रहा है, जो यह सवाल भी छोड़ जाता है कि आखिर पारदर्शिता की असली परीक्षा कब होगी।

