भवानीमंडी में कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने मचाई तबाही, शादियों के टेंट और पांडाल हुए जमींदोज


भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )
नगर और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुरुवार, 30 अप्रैल को मौसम ने ऐसा तांडव मचाया कि खुशियों का माहौल अफरा-तफरी में बदल गया। दोपहर तक भीषण गर्मी झेल रहे लोगों को शाम होते-होते कुदरत के रौद्र रूप का सामना करना पड़ा। तेज आंधी और ओलावृष्टि ने न केवल जनजीवन प्रभावित किया, बल्कि शादी वाले घरों की तैयारियों पर भी पानी फेर दिया।



शादियों की तैयारियों पर फिरा पानी

30 अप्रैल को भवानीमंडी और ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर शादियों के आयोजन थे। कई जगह प्रीतिभोज और समारोह के लिए भव्य टेंट लगे थे और पांडाल सजे हुए थे। लेकिन दोपहर 3:30 बजे आई तेज आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई। हवा का वेग इतना भीषण था कि देखते ही देखते भारी-भरकम टेंट उखड़ गए और सजावटी पांडाल धराशायी हो गए। टेंट गिरने से आयोजन स्थलों पर अफरा-तफरी मच गई और शादी वाले परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।



आधे घंटे का ‘कुदरती तांडव’

दोपहर 3:00 बजे तक जहां सूरज आग उगल रहा था, वहीं 3:30 बजे अचानक आसमान में काली घटाएं छा गईं। बिजली की कड़कड़ाहट के साथ शुरू हुई बारिश ने देखते ही देखते ओलावृष्टि का रूप ले लिया। करीब 20 मिनट तक अंटी और चने के आकार के ओले गिरे। इस दौरान सड़कों और नालियों में पानी बहकर सड़क पर आ गया ।

बिजली गुल, पेड़ गिरे और उड़े मकानों के चद्दर

आंधी-तूफान के कारण शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। जगह-जगह पेड़ गिरने और मकानों के टीन-शेड उड़ने की खबरें आईं। बिजली गुल हुई यदि यह शाम तक नहीं आती है तो अंधेरे में शादियों के इंतजाम करना आयोजकों के लिए बड़ी चुनौती बन जावेगा।

अजब मौसम: बारिश के बाद फिर खिली धूप और वापस बादल छाए

मौसम का मिजाज इतना विचित्र रहा कि आधे घंटे की तबाही के बाद शाम 4:00 बजे एक बार फिर से तेज धूप निकल आई। 10 मिनट धूप निकलने के बाद वापस आसमान में बादल छा गए । ठंडी हवाओं ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन पीछे तबाही के निशान छोड़ गई। लोगों के मुंह से बस यही निकला— “वाह रे मौसम तेरी गजब माया, कभी धूप, कभी बारिश और कभी छाया।”

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