व्यंग्य: “धमकी हाईटेक, तलाश लो-टेक”(कार्टून: प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट अशोक)


भवानीमंडी ( जगदीश पोरवाल )
राजधानी जयपुर में एक बार फिर “ईमेल बम” ने सिस्टम की नींद उड़ा दी। राजस्थान विधानसभा, राजस्थान हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलते ही पुलिस महकमा अलर्ट मोड में आ गया—या यूं कहें कि “रूटीन अलर्ट” पर आ गया।
सुबह 11:10 बजे आए ईमेल में तीन घंटे के भीतर आरडीएक्स से उड़ाने की चेतावनी दी गई। इसके बाद वही पुराना सीन—बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, परिसर खाली, अफसरों की भागदौड़… और आखिर में “कुछ नहीं मिला” का सुकूनभरा निष्कर्ष।

कार्टूनिस्ट अशोक ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखा कटाक्ष किया है। कार्टून में एक आम आदमी पुलिस से सवाल करता नजर आता है—
“शर्म की बात है, एडवांस टेक्नोलॉजी, जांबाज टीम… फिर भी धमकियां देने वाले मच्छर को नहीं पकड़ पा रही है!”

दरअसल, यह “मच्छर” अब सिस्टम के लिए मलेरिया बन चुका है। फरवरी की 6, 17, 19, 20 तारीख और फिर 17 मार्च—धमकियां लगातार आती रहीं, लेकिन आरोपी अब भी

डिजिटल अंधेरे में सुरक्षित है।

व्यवस्था की विडंबना देखिए—ईमेल हाईटेक, जांच हाई-प्रोफाइल, लेकिन नतीजा हर बार लो-रिजल्ट। ऐसा लगता है जैसे सिस्टम हर बार “मॉक ड्रिल” में ही व्यस्त है और असली खिलाड़ी स्क्रीन के पीछे बैठकर अगली धमकी का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है।
कार्टून का संदेश साफ है—
जब तक ‘मच्छर’ नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक ‘मच्छरदानी’ ही तनी रहेगी… और जनता तमाशा देखती रहेगी।

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