भारत की सांस्कृतिक आत्मा का रक्षा सूत्र है संघ: जितेंद्र सोनी

भवानी मंडी। ( जगदीश पोरवाल )राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भवानी मंडी नगर द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पद्मावत रिसॉर्ट में ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

​हिन्दू शब्द सभ्यतागत पहचान: मुख्य वक्ता

​गोष्ठी के मुख्य वक्ता, चित्तौड़ प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख जितेन्द्र सोनी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत से प्रेम करने वाला और अपनी पहचान पर गर्व करने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दू शब्द केवल धार्मिक परिभाषा नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक निरंतरता से निर्मित एक सभ्यतागत पहचान है। उन्होंने डॉ. हेडगेवार के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा, “भारत और हिन्दू एक-दूसरे के पर्याय हैं।”

​व्यक्ति-निर्माण से विश्वगुरु की ओर

​संघ की कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए सोनी ने कहा कि संघ का उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यक्ति-निर्माण के माध्यम से समाज को संगठित कर भारत को विश्वगुरु बनाना है। उन्होंने आह्वान किया कि लोग पूर्वाग्रह त्यागकर संघ को समझने के लिए शाखा तक पहुँचें। संघ को उन्होंने त्याग, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी बताया।

​पंच परिवर्तन और सामाजिक चुनौतियाँ

​मुख्य वक्ता ने समाज में पंच परिवर्तन की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें:

  • ​सामाजिक समरसता
  • ​कुटुंब प्रबोधन
  • ​नागरिक कर्तव्य
  • ​स्वबोध
  • ​पर्यावरण संरक्षण

​उन्होंने विशेष रूप से ‘कुटुंब प्रबोधन’ पर जोर देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों की कहानियाँ और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व याद रखने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अवैध घुसपैठ, असंतुलित जनसंख्या नीति और विभाजनकारी शक्तियों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।

​गरिमामयी उपस्थिति

​कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि और वंदे मातरम के गायन के साथ हुआ। मंच पर माननीय संघचालक बनेसिंह भी उपस्थित रहे। गोष्ठी में नगर के शिक्षाविद, व्यवसायी और स्वयंसेवकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का औपचारिक परिचय एवं स्वागत किया गया।

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