भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल ) राजस्थान सरकार का नारा है “बढ़ता राजस्थान”, और प्रदेश के भ्रष्ट सरकारी कारिंदों ने इस नारे को इतनी गंभीरता से लिया है कि उन्होंने रिश्वत के ‘रेट कार्ड’ को सीधे सात अंकों (लाखों) में पहुँचा दिया है। झुंझुनू PWD (सार्वजनिक निर्माण विभाग) में हाल ही में हुआ 33 लाख रुपये का ‘छोटा सा’ लेन-देन इसी ‘प्रगति’ का जीता-जागता प्रमाण है।
विरासत में मिलता है ‘कमीशन’ का चार्ज
व्यंग्य की दुनिया के माहिर खिलाड़ी अशोक श्री श्रीमाल ने अपने कार्टून के जरिए व्यवस्था की नब्ज पर करारी चोट की है। कार्टून साफ बयां कर रहा है कि विभागों में अधिकारी रिटायर भले हो जाएं, लेकिन जाते-जाते अपनी ‘रिश्वत की कुर्सी’ और ‘कमीशन का चार्ज’ नए आने वाले साहब को बड़ी ईमानदारी से सौंप कर जाते हैं। यहाँ कर्मचारी सेवा-निवृत्त होते हैं, भ्रष्टाचार नहीं!
खून में दौड़ते रिश्वत के कण
हालिया खबर के मुताबिक, एसीबी (ACB) ने एक दलाल को 33 लाख रुपये की घूस लेते रंगे हाथों दबोचा, जिसके तार सीधे PWD के अधिशाषी अभियंता (XEN) राकेश कुमार से जुड़े पाए गए। कहने को तो 70 लाख की मांग थी, लेकिन शायद ‘बढ़ते राजस्थान’ में अभी डिस्काउंट चल रहा था।
आलम यह है कि सरकार चाहे कितनी ही लगाम कसे,
भ्रष्टाचार अब नीति नहीं, बल्कि इन साहबों की ‘बायोलॉजी’ बन चुका है। धमनियों में खून के साथ-साथ रिश्वत के कण इस कदर घुल गए हैं कि एसीबी की कार्रवाई भी इन्हें बस एक ‘प्रोफेशनल रिस्क’ (काम का हिस्सा) लगती है।
बढ़ता राजस्थान, बढ़ता भ्रष्टाचार
विभाग: PWD झुंझुनू (जहाँ विकास कम, डिमांड ज्यादा दिखती है)।
स्लोगन का असर: विकास की रफ्तार का पता नहीं, पर घूस की राशि सात अंकों तक जरूर पहुँच गई है।
सिस्टम का हाल: एसीबी जाल बिछाती रह जाती है और ‘साहब’ अगले शिकार की फाइल तैयार कर लेते हैं।

करारा व्यंग्य
सरकार चाहे जितने प्रयत्न करे, लेकिन जब तक भ्रष्टाचार ‘विरासत’ के रूप में अगली पीढ़ी को सौंपा जाता रहेगा, तब तक आम आदमी इसी तरह ‘बढ़ते राजस्थान’ के बोर्ड के नीचे अपनी जेब कटते देखता रहेगा।
