भवानीमंडी ( जगदीश पोरवाल )। वैश्विक राजनीति के शतरंज बोर्ड पर एक बार फिर ऐसा मोड़ आया है, जहां चाल भी उसी की और मात भी उसी की दिखाई दे रही है। Donald Trump ने मिडिल ईस्ट में दो हफ्ते के युद्ध विराम की घोषणा क्या की, दुनिया भर में सवालों और व्यंग्य का दौर शुरू हो गया।
प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट अशोक की ताजा कृति ने इस पूरे घटनाक्रम को एक ही लाइन में समेट दिया—
“सब कुछ लुटा कर होश में आए तो क्या किया!”
पहले आग, फिर अग्निशामक
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह स्थिति उस व्यक्ति जैसी है, जो पहले खुद ही घर में आग लगाता है और फिर बाल्टी लेकर ‘हीरो’ बनने पहुंच जाता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और फिर अचानक युद्ध विराम की घोषणा ने अमेरिका की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘बिग ब्रदर’ या ‘ड्रामा डायरेक्टर’?
दुनिया के ‘बिग ब्रदर’ की छवि रखने वाला अमेरिका अब कुछ लोगों को ‘ड्रामा डायरेक्टर’ ज्यादा लगने लगा है—
जहां स्क्रिप्ट भी वही लिखता है, क्लाइमैक्स भी तय करता है और तालियां भी खुद ही बजवाता है।
कार्टून में छिपी कड़वी सच्चाई
कार्टून में पसीने से तर-बतर ट्रंप और ‘सीजफायर’ का संदेश लेकर बैठा कौवा, उस सच्चाई को उजागर करता है जिसे शब्दों में कहना मुश्किल होता है।
यह सिर्फ एक चित्र नहीं, बल्कि उन लोगों की पीड़ा है जो इस राजनीतिक खेल में सबसे ज्यादा नुकसान उठाते हैं।
देश में भी उठ रहे सवाल
अमेरिका के भीतर भी इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। विपक्ष इसे ‘पॉलिटिकल स्टंट’ बता रहा है, जबकि आम जनता पूछ रही है—
अगर शांति ही लक्ष्य था, तो युद्ध की नौबत क्यों आई?
शांति या सियासत?
आखिर में सवाल वही—
क्या यह युद्ध विराम सच में शांति की पहल है, या फिर सियासत की एक और चाल?
कार्टूनिस्ट अशोक की कलम ने जो दिखाया, वह शायद आने वाले समय की हकीकत बन जाए—
जब दुनिया पूछेगी: “लड़ाई किसने शुरू की… और शांति का श्रेय कौन ले गया?”
