हौसलों की उड़ान: पिता के साये के बिना अंजली ने गाड़े सफलता के झंडे, 12वीं में हासिल किए 92.60% अंक
मिश्रोली। ( अमजद अली )“जहाँ चाह, वहाँ राह” वाली कहावत को मिश्रोली की बेटी अंजली सुमन ने सच कर दिखाया है। पिता के आकस्मिक निधन और घर की तंगहाली भी अंजली के इरादों को डिगा नहीं सकी। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मिश्रोली की इस छात्रा ने 12वीं कक्षा में 92.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर न केवल अपने विद्यालय, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
संघर्षों से भरा रहा सफर
अंजली की यह सफलता केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि पांच सालों के कड़े संघर्ष की कहानी है। करीब पांच वर्ष पूर्व एक दुखद हादसे में उनके पिता, कन्हैया लाल सुमन का खेत पर काम करते समय करंट लगने से निधन हो गया था। पिता के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन अंजली की माँ ने हिम्मत नहीं हारी।
”पति के जाने के बाद घर और बच्चों की जिम्मेदारी बड़ी थी, लेकिन मैंने तय किया था कि बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दूँगी।” — अंजली की माता
बिना कोचिंग, मात्र स्वाध्याय से पाई सफलता
आज के दौर में जहाँ छात्र महंगी कोचिंग पर निर्भर हैं, वहीं अंजली ने साबित किया कि अनुशासन और एकाग्रता से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। अंजली की सफलता के मुख्य सूत्र:
- नियमितता: प्रतिदिन करीब 6 घंटे की लगन से पढ़ाई।
- सेल्फ स्टडी: बिना किसी बाहरी कोचिंग के केवल स्कूल और घर पर मेहनत।
- लक्ष्य: भविष्य में शिक्षिका बनकर समाज में शिक्षा की अलख जगाने का सपना।
क्षेत्र में खुशी का माहौल
अंजली की इस उपलब्धि पर विद्यालय स्टाफ और ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है। लोगों का कहना है कि अंजली और उनकी माता का जज्बा समाज के लिए एक मिसाल है। सीमित संसाधनों में इतनी बड़ी सफलता प्राप्त करना यह दर्शाता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बन सकतीं।


