त
झालावाड़ 02 अप्रैल। आधुनिक तकनीक जब मानवीय संवेदनाओं से मिलती है, तो वह समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए वरदान बन जाती है। झालावाड़ जिले की ग्राम पंचायत बैरागढ़ में मस्तिष्क पक्षाघात (Cerebral Palsy) और बौद्धिक अक्षमता से जूझ रही 7 साल की मासूम बच्ची ‘आशा’ के लिए प्रशासन की यह नेक पहल एक नई उम्मीद लेकर आई है।
बायोमेट्रिक्स की बाधा को किया पार
बालिका के पिता रमेश कई बार आधार केंद्रों के चक्कर काट चुके थे, लेकिन प्रतिकूल शारीरिक स्थिति के कारण बच्ची की उंगलियों के निशान स्कैन नहीं हो पा रहे थे।
जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ की संवेदनशीलता और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) के विशेष प्रयासों से कई असफल कोशिशों के बाद आखिरकार आधार नामांकन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
15 दिनों में मिले सभी सरकारी हक
प्रशासन ने समन्वय दिखाते हुए मात्र 15 दिनों के भीतर बच्ची के लिए विभिन्न दस्तावेज और लाभ सुनिश्चित किए किए गए –
- आधार व जनाधार कार्ड: राजकीय योजनाओं का प्रवेश द्वार
- राशन का अधिकार: नाम जुड़ते ही मौके पर ही दिव्यांग बच्ची की ekyc कर सम्पूर्ण परिवार का गेहूं उपलब्ध कराया गया
- सामाजिक सुरक्षा: ‘आशा’ को मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना में पीपीओ जारी किया गया
- अन्य सुविधाएं: बैंक बचत खाता (LDM के सहयोग से) और विशेष योग्यजन पहचान पत्र (UDID कार्ड, चिकित्सा विभाग के सहयोग से) जारी करवाया गया
लोकेश कुमार जैन, ब्लॉक प्रोग्रामर ने बताया कि अक्सर विशेष योग्यजनों के बायोमेट्रिक्स लेने में तकनीकी दिक्कतें आती हैं, लेकिन विशेष प्रयासों से कोई भी सॉफ्टवेयर बाधा नहीं बन सकता।
सुशासन की मिसाल
इस कार्य में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग अकलेरा के सहायक प्रोग्रामर रोहित पारेता के अथक प्रयास एवं चिकित्सा, रसद, बैंक, सांख्यिकी और पंचायत समिति जैसे विभागों से समन्वयता ने एक टीम की तरह कार्य किया। यह घटना साबित करती है कि तकनीक का असली उद्देश्य केवल डेटा प्रबंधन नहीं, बल्कि उस ‘आशा’ को पूरा करना है जो समाज के वंचित वर्ग की आँखों में होती है।।
ग्राम पंचायत आमेठा में गुरुवार को आयोजित ग्राम पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में उपखण्ड अधिकारी बृजेश कुमार, विकास अधिकारी आदेश कुमार मीना, नायब तहसीलदार संपत राम वर्मा, ब्लॉक प्रोग्रामर लोकेश जैन इत्यादि ने ‘आशा’ को अपडेटेड आधार कार्ड, राशन कार्ड, udid कार्ड, जनाधार कार्ड, पेंशन पीपीओ, बैंक डायरी सभी दस्तावेज उपलब्ध करवाएं, जिन्हें पाकर बालिका के दादा, दादी व पिता, प्रशासन की इस संवेदनशील पहल पर भावुक हो उठे।
——००——
