झालावाड़/भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल): समाज में जब संवेदनाएं दम तोड़ देती हैं और चश्मदीद खामोश हो जाते हैं, तब अक्सर अपराधी कानून की गिरफ्त से बच निकलते हैं। लेकिन अकलेरा थाना क्षेत्र के चांदीपुर गांव में हुई एक महिला की मौत के मामले में झालावाड़ पुलिस ने अपनी सजगता से यह साबित कर दिया कि ‘मौन समाज’ की अनदेखी के बावजूद न्याय जीवित है।
हादसे की पटकथा, हत्या का सच
बीते 7 नवंबर 2025 को सूचना मिली थी कि एक महिला की सीढ़ियों से गिरने के कारण मृत्यु हो गई है। पीहर और ससुराल, दोनों पक्षों ने इसे सामान्य दुर्घटना मानकर कोई संदेह नहीं जताया। लेकिन जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुढानिया की पैनी नजर और गोपनीय सूचनाओं ने इस केस की दिशा बदल दी। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए हेड कांस्टेबल सतवीर के जरिए FIR दर्ज कराई।
वैज्ञानिक अनुसंधान ने खोली पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच डीएसपी हर्षराज सिंह खरेडा को सौंपी गई। पुलिस ने केवल बयानों पर भरोसा न कर आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया:
- क्राइम सीन रिक्रिएशन: FSL निदेशक की मदद से घटना स्थल का वैज्ञानिक पुनःनिर्माण कराया गया।
- मेडिकल बोर्ड की राय: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर 19 जानलेवा चोटें पाई गईं, जो किसी भी हाल में सीढ़ियों से गिरने से संभव नहीं थीं।
- तकनीकी विश्लेषण: साक्ष्यों ने स्पष्ट कर दिया कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि क्रूरता पूर्वक की गई हत्या थी।
“यह ‘ब्लाइंड मर्डर’ नहीं था। ब्लाइंड मर्डर में पहचान अज्ञात होती है, यहाँ तो सब जानते थे कि क्या हुआ है, फिर भी समाज ने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। यह चुप्पी अन्याय की पराकाष्ठा थी।” – झालावाड़ पुलिस
आरोपी पति गिरफ्तार, पुलिस पर भी किया हमला
पुलिस ने पुख्ता सबूतों के आधार पर मृतका के पति देवीलाल (देवीकृपाल) को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर राजकार्य में बाधा डाली। पुलिस ने हत्या के साथ-साथ पुलिस पर हमले का भी नया मामला दर्ज किया है।
समाज की चुप्पी पर सवाल
यह मामला न केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी का है, बल्कि उस सामाजिक ढांचे पर भी सवाल उठाता है जो 19 चोटों के निशान देखकर भी चुप रहा। पुलिस का स्वतः संज्ञान लेना और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना इस बात का प्रमाण है कि कानून की आंखें बंद नहीं हैं, भले ही समाज ने मुंह फेर लिया हो।

