भवानीमंडी। विशिष्ट न्यायालय (NDPS) एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भवानीमंडी ने वर्ष 2014 के एक बड़े ड्रग तस्करी मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने करीब 1920 किलो डोडा चूरा की तस्करी के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें 15-15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.50 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
अपर लोक अभियोजक हेमराज शर्मा ने बताया यह मामला 3 दिसंबर 2014 का है। तत्कालीन थाना प्रभारी चंद्रप्रकाश को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पिपल्या तिराहे से सुकेत रोड पर तालाब के पास एक लावारिस ट्रक खड़ा है, जिसमें केले के पत्तों के नीचे मादक पदार्थ छिपाया गया है। पुलिस ने जब ट्रक की तलाशी ली, तो वहां 48 कट्टों में भरा हुआ 1929 किलो 600 ग्राम डोडा चूरा बरामद हुआ। कट्टों का वजन घटाने के बाद शुद्ध मादक पदार्थ का वजन 1920 किलोग्राम पाया गया।
वैज्ञानिक जांच से पकड़े गए आरोपी
तस्करों ने पुलिस को चकमा देने के लिए ट्रक पर गलत रजिस्ट्रेशन नंबर लिख रखा था और इंजन व चेसिस नंबर भी मिटा दिए थे। हालांकि, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के विशेषज्ञों की मदद से ट्रक के वास्तविक नंबरों का पता लगाया गया, जिससे इसके असली मालिकों तक पहुँच संभव हो सकी।
जांच के बाद पुलिस ने निम्नलिखित दो आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया:
संगम सिंह राणा उर्फ संदीप सिंह राणा (निवासी नलखेड़ा, हाल सुसनेर, म.प्र.)
राजेन्द्र सिंह (निवासी जनता कॉलोनी, खजरानी, इंदौर)
न्यायालय का कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक हेमराज शर्मा ने पैरवी की। मामले को साबित करने के लिए न्यायालय में 26 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 176 दस्तावेज साक्ष्य के रूप में पेश किए गए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, माननीय न्यायालय ने थाना भवानीमंडी में दर्ज FIR नंबर 473/2014 (धारा 8/25 NDPS एक्ट) के तहत संगम सिंह और राजेन्द्र सिंह को दोषी माना। समाज में बढ़ते नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से कोर्ट ने दोनों को कड़ी सजा से दंडित किया है।

नोट – AI द्वारा निर्मित काल्पनिक चित्र है ।
