गाड़ी-बंगला-पैसा सब फीका पड़ा, कमर्शियल गैस की किल्लत में भरा सिलेंडर बना नया ‘स्टेटस सिंबल’

मेरे पास… पाँच भरे गैस सिलेंडर हैं!” – ‘दीवार’ के डायलॉग का नया जमाने वाला व्यंग्य


भवानीमंडी | जगदीश पोरवाल

कभी हिंदी सिनेमा में फिल्म दीवार का मशहूर डायलॉग “मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, पैसा है…” और उसके जवाब में “मेरे पास मां है” भावनाओं का प्रतीक माना जाता था। लेकिन बदलते समय में अब इस डायलॉग का भी नया व्यंग्यात्मक संस्करण सामने आ गया है।

शहर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि अब गाड़ी, बंगला और पैसा दिखाने से ज्यादा अहमियत भरे हुए गैस सिलेंडरों की हो गई है।
प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल के एक चर्चित व्यंग्य कार्टून में मौजूदा हालात पर तीखा कटाक्ष किया गया है। कार्टून में एक अमीर व्यक्ति अपने आलीशान बंगले, महंगी कार और पैसों का रौब दिखाते हुए पूछता है – “तुम्हारे पास क्या है?”
सामने खड़ा दूसरा व्यक्ति मुस्कुराते हुए जवाब देता है –
“मेरे पास… मेरे पास… पाँच भरे गैस सिलेंडर हैं भाई!”
यही जवाब आज के हालात पर सबसे सटीक व्यंग्य बन गया है।
स्थिति यह है कि…
शहर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
होटल, रेस्टोरेंट और गैस से चलने वाले वाहन संचालक परेशान हैं।
कई जगह सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
अतिरिक्त सिलेंडर का इंतजाम करना किसी ‘खजाने’ से कम नहीं माना जा रहा।

जब जरूरत बन जाए स्टेटस सिंबल

पहले अमीरी की पहचान
अब नई पहचान
बंगला
भरे गैस सिलेंडर
महंगी कार
गैस का स्टॉक
बैंक बैलेंस
सिलेंडर की उपलब्धता

कार्टून का संदेश

यह व्यंग्य केवल हंसी नहीं देता, बल्कि मौजूदा हालात की सच्चाई भी बताता है। जब रोजमर्रा की जरूरतें दुर्लभ होने लगती हैं, तो वही चीजें अमीरी का प्रतीक बन जाती हैं।

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