चुनाव की ‘अवमानना गेंद’ किसके पाले में?कोर्ट बोला–15 अप्रैल तक चुनाव कराओ, सरकार बोली–पहले ओबीसी रिपोर्ट आने दो




भवानीमंडी। ( जगदीश पोरवाल )
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर खींचतान अब व्यंग्य का विषय बनती जा रही है। कार्टूनिस्ट अशोक श्री श्रीमाल का एक कार्टून में तंज कसते हुए दिखाया गया है कि चुनाव आयोग ने “अवमानना की गेंद” अफसरों के पाले में डाल दी है, और दूसरी ओर से आवाज आती है—“देखना है अफसर इस गेंद को किधर डालते हैं।”

दरअसल प्रदेश में इस समय पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। लोकतंत्र के तीनों स्तंभ—न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका—अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन चुनाव की तारीख को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं हो पा रही है।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि 15 अप्रैल तक पंचायत और निकाय चुनाव कराए जाएं। लेकिन इस तारीख में अब लगभग 32 दिन ही शेष हैं और सरकार की तैयारी अधूरी बताई जा रही है।

सरकार का कहना है कि चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग की रिपोर्ट जरूरी है। बिना रिपोर्ट के आरक्षण तय नहीं होगा और बिना आरक्षण के चुनाव कराने पर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। इसलिए सरकार 15 अप्रैल की तारीख आगे बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रही है।

इधर चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी ओर से चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी हैं। आयोग का स्पष्ट संकेत है कि अब फैसला सरकार को करना है।
यानी फिलहाल प्रशासनिक गलियारों में यही चर्चा है कि चुनाव की गेंद सरकार के पाले में है।

इस बीच चुनाव आयोग ने निकाय चुनाव की मतदाता सूची जारी करने की तारीख 22 अप्रैल तय कर दी है, जिससे यह सवाल भी उठने लगा है कि जब कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दिया है तो वोटर लिस्ट उसके बाद क्यों?

पंचायत चुनाव के कानूनी पहलुओं पर चर्चा के लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक भी बुलाई गई थी। अधिकारी समय पर सूट-बूट और फाइलों के साथ पहुंच गए, लेकिन ऐन वक्त पर बैठक ही निरस्त कर दी गई।

अफसरों के बीच इस पर भी हल्का व्यंग्य सुनाई दिया—

“चुनाव की तरह बैठक भी शायद सही समय का इंतजार कर रही है।”
इस समय पूरे प्रदेश में पंचायत और निकायों का कामकाज प्रशासन के हवाले है। जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने के बाद अधिकारी ही व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं।

फैक्ट बॉक्स : राजस्थान के पंचायत चुनाव

14,403 ग्राम पंचायतें
457 पंचायत समितियां
41 जिला परिषदें
15 अप्रैल तक चुनाव कराने का कोर्ट आदेश
करीब 32 दिन का समय शेष

क्या है मुख्य पेच

पंचायत और निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय होना बाकी
आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार
सरकार चाहती है कि चुनाव की तारीख आगे बढ़े
चुनाव आयोग कह रहा—हमारी तैयारी पूरी

व्यंग्य कटाक्ष

कोर्ट : चुनाव कराओ
सरकार : रिपोर्ट आने दो
चुनाव आयोग : तैयारी पूरी
अफसर : आदेश किसका मानें?

पंचलाइन

राजस्थान में इस समय पंचायत चुनाव की हालत ऐसी है कि आदेश कोर्ट दे रहा है, तैयारी आयोग बता रहा है और तारीख सरकार तलाश रही है… जनता बस यह देख रही है कि लोकतंत्र की “चुनावी गेंद” आखिर किसके गोलपोस्ट में जाकर टिकेगी।

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