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स्टेशन पार्किंग बनी ‘सुविधा’ से ज्यादा ‘अनिवार्यता’, बाहर खड़े वाहन खींचकर वसूली के आरोप
भवानीमंडी | भवानीमंडी रेलवे स्टेशन पर 18 फरवरी 2026 से शुरू हुए नए पार्किंग ठेके ने रेलवे की आमदनी तो चार गुना बढ़ा दी, लेकिन यात्रियों के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है।
जहां पहले पार्किंग ठेका करीब 5 लाख रुपए में होता था, वहीं इस बार यह बढ़कर 18.31 लाख रुपए में चला गया। यानी रेलवे की झोली भरी, लेकिन सवाल उठ रहा है—क्या अब इसकी कीमत यात्रियों से वसूली जा रही है?
क्या है पूरा मामला?
स्टेशन के बाहर खड़े दुपहिया वाहनों को ठेका कर्मियों द्वारा खींचकर पार्किंग में ले जाने के आरोप।
वाहन मालिकों से ₹50 तक वसूली की शिकायत।
एक कार चालक, जो सिर्फ पैसेंजर छोड़ने आया था, उससे भी शुल्क वसूलने का मामला।
रेलवे की शिकायत पुस्तिका में दर्ज हुई आपत्ति।
यात्रियों का कहना है कि जब वे वाहन के पास मौजूद होते हैं और सिर्फ लेने-छोड़ने आए हैं, तब भी दबाव बनाकर पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है।

क्या हैं दरें?
सूत्रों के अनुसार पार्किंग शुल्क इस प्रकार बताया जा रहा है—
दुपहिया: 6 घंटे तक ₹10
कार: 6 घंटे तक ₹20
लेकिन मौके पर स्पष्ट दर सूची और नियमों का बोर्ड नजर नहीं आ रहा, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
नियम क्या कहते हैं?
रेलवे नियमों के मुताबिक—
नो पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करना प्रतिबंधित है।
लेकिन पिक एंड ड्रॉप के लिए अल्पकालिक ठहराव की अनुमति रहती है, यदि यातायात बाधित न हो।
नियम, दरें और दंड की जानकारी बोर्ड पर प्रदर्शित होना अनिवार्य है।
यदि सूचना बोर्ड ही नहीं होगा तो यात्रियों को कैसे पता चलेगा कि पार्किंग सुविधा ऐच्छिक है या अनिवार्य?
यात्रियों के सामने दो रास्ते:-
स्टेशन पर उपलब्ध शिकायत पुस्तिका में आपत्ति दर्ज कराएं।
संबंधित रेलवे मंडल या रेलवे मंत्रालय को लिखित शिकायत भेजें।
बड़ा सवाल-सुविधा काम और मजबूरी ज्यादा-
रेलवे “मुसाफिरों को बेहतर सुविधा” का दावा करता है। लेकिन यदि वाहन जबरन खींचकर पार्किंग में ले जाए जाएं और शुल्क वसूला जाए, तो यह सुविधा कम और मजबूरी ज्यादा लगती है।
अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन नियमों का स्पष्ट प्रदर्शन कर पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा या यह पार्किंग ठेका आगे भी विवादों की वजह बनता

