भवानीमंडी (जगदीश पोरवाल )
“लगन, इच्छाशक्ति और समाज सेवा का जज्बा उम्र का मोहताज नहीं होता। अगर मन में कुछ कर गुजरने का संकल्प हो, तो राहें अपने आप आसान हो जाती हैं।”
इस कहावत को सच कर दिखाया है 8 से 14 साल के कुछ नन्हे पर्यावरण प्रेमियों ने। जहाँ इस उम्र के बच्चे खेल-कूद और वीडियो गेम्स में व्यस्त रहते हैं, वहीं इन बच्चों ने पर्यावरण सुधार का बीड़ा उठाया है। लगभग 20 बच्चों की इस अनूठी टीम ने मिलकर ‘बाल सेवा संघ’ का गठन किया है, जो समाज के लिए प्रेरणा की एक नई मिसाल बन चुका है।
खुद की ‘पॉकेट मनी’ से पर्यावरण की सेवा
इस संघ की सबसे अनोखी और चौंकाने वाली बात यह है कि ये बच्चे अपने इस नेक कार्य के लिए किसी बाहरी संस्था या व्यक्ति से कोई आर्थिक सहयोग नहीं लेते। बच्चों को उनके घरवालों से मिलने वाली पॉकेट मनी (जेब खर्च) को ही वे इस सेवा कार्य में लगाते हैं। इसी पैसे से वे बाजार जाकर विभिन्न प्रकार के पौधों के बीज खरीदते हैं और उन्हें खुले स्थानों पर रोपित करते हैं।
600 घरों तक पहुँचाई हरियाली की गूंज
‘बाल सेवा संघ’ के सदस्य पार्थ बियाणी ने बताया कि संघ में शामिल ज्यादातर बच्चे पाँचवीं से आठवीं कक्षा के छात्र हैं। बच्चों ने अपने विवेक से काम करते हुए पर्यावरण सुधार को अपना पहला लक्ष्य बनाया।
अब तक की मुख्य उपलब्धियाँ:
बीज वितरण: बच्चों ने अब तक करीब 600 घरों में नीम, गुलमोहर, चीकू, आम और जामुन जैसे विभिन्न छायादार और फलदार पौधों के बीज बाँटे हैं।
पक्षियों की सेवा: भीषण गर्मी के मौसम में इन नन्हे हाथों ने पेड़ों पर पक्षियों के लिए परिंढे (पानी के पात्र) बाँधे और उनके दाने-पानी का नियमित इंतजाम भी किया।
मांडवी बालाजी क्षेत्र में किया बीजारोपण
इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए शनिवार को बाल सेवा संघ के 10 सदस्यों की टीम शहर से 3 किलोमीटर दूर स्थित मांडवी बालाजी मंदिर क्षेत्र पहुँची। यहाँ बच्चों ने मिलकर आस-पास के खाली पड़े मैदानी इलाकों में बड़े पैमाने पर बीजारोपण (सीड बॉल्स/बीज रोपण) किया।
इस सराहनीय कार्य में पार्थ बियानी, रेयांश पोरवाल, श्रेयांश दीक्षित, आगम जैन, वरदान गुप्ता, कुणाल शर्मा, अरपम जैन, मुदित बिरला, वंश भराड़ीया और वेदांत मंगल सहित टीम के अन्य बच्चों ने अपना सक्रिय योगदान दिया।
पर्यावरण बचाने के लिए बड़ी-बड़ी बेठको व भारी बजट की जरूरत नहीं होती
इन नन्हे बच्चों का यह प्रयास हमें सिखाता है कि पर्यावरण को बचाने के लिए बड़ी-बड़ी बैठकों या भारी बजट की जरूरत नहीं होती, बल्कि एक सच्चे संकल्प और छोटे-छोटे प्रयासों की जरूरत होती है। यदि देश का हर बच्चा और नागरिक इन बच्चों की तरह अपनी जिम्मेदारी समझने लगे, तो हमारी धरती को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनने से कोई नहीं रोक सकता। ‘बाल सेवा संघ’ के इन नन्हे हीरोज को हमारा सलाम!

